रक्षाबंधन पर उदयपुर के शिल्पी का अनोखा कमाल, सोने-डायमंड से बनाई ‘करिश्मा-ए-तिरंगी राखी’
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डॉ. इक्बाल सक्का का दावा-लेंस से दिखाई देती है राखी, वजन 00.0 मिलीग्राम, बनाने में लगे 7 घंटे
उदयपुर, 26 अगस्त: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भाई-बहन के प्रेम के साथ देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने वाली एक अनूठी कलाकृति सामने आई है। उदयपुर के प्रसिद्ध शिल्पी एवं 211 विश्व रिकॉर्ड अपने नाम करने का दावा करने वाले डॉ. इक्बाल सक्का ने सोने और अमेरिकन डायमंड से ‘करिश्मा-ए-तिरंगी राखी’ तैयार की है। सक्का का दावा है कि यह दुनिया की पहली ऐसी राखी है, जिसे सामान्य आंखों से देखना संभव नहीं है। इसे देखने के लिए लेंस का सहारा लेना पड़ता है।
लेंस से दिखता है सोना और अमेरिकन डायमंड
डॉ. सक्का के अनुसार राखी को तिरंगे रेशमी धागे में तैयार किया गया है। लेंस की मदद से देखने पर इसमें बेहद सूक्ष्म आकार की सोने की राखी और उसमें जड़ा अमेरिकन डायमंड नजर आता है। खास बात यह है कि लेंस हटाने के बाद केवल तिरंगा रेशमी धागा दिखाई देता है। अत्यंत सूक्ष्म कारीगरी के कारण इसे तैयार करना चुनौतीपूर्ण रहा।
सात घंटे में तैयार हुई अनोखी राखी
शिल्पी ने बताया कि इस कलाकृति को तैयार करने में करीब सात घंटे का समय लगा। सोने की बारीक कारीगरी और डायमंड को तिरंगे धागे में पिरोने के लिए विशेष सूक्ष्म तकनीक का इस्तेमाल किया गया। उनके अनुसार राखी का वजन इतना कम है कि धर्म कांटे पर भी 00.0 मिलीग्राम दर्ज होता है। उन्होंने इसे हवा से भी हल्का बताते हुए कहा कि फूंक मारने पर राखी उड़ सकती है।
भाई-बहन के रिश्ते के साथ राष्ट्रप्रेम का संदेश
डॉ. सक्का ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और एकता का संदेश भी देता है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए उन्होंने राखी में तिरंगे को शामिल किया है। उनका उद्देश्य भाई-बहन के अटूट रिश्ते को देशप्रेम और राष्ट्रीय एकता की भावना से जोड़ना है। अपनी सूक्ष्म एवं प्रयोगधर्मी कलाकृतियों के लिए पहचान बनाने वाले सक्का इससे पहले भी कई अनूठी रचनाएं तैयार कर चुके हैं।

