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अक्षय तृतीया और पीपल पूर्णिमा पर बाल विवाह रोकने प्रशासन मुस्तैद

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अक्षय तृतीया और पीपल पूर्णिमा पर बाल विवाह रोकने प्रशासन मुस्तैद

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बाल विवाह किया तो खैर नहीं
जिला प्रशासन सख्त, विशेष निर्देश जारी
कंट्रोल रूम स्थापित, त्रिस्तरीय समितियां गठित
उदयपुर, 13 अप्रैल
: आगामी अक्षय तृतीया (19 अप्रैल 2026) और पीपल पूर्णिमा (01 मई 2026) के अवसर पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए उदयपुर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट गौरव अग्रवाल ने सख्त आदेश जारी कर अधिकारियों को कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
निगरानी के लिए त्रि-स्तरीय समितियों का गठन
प्रशासन ने जमीनी स्तर पर बाल विवाह रोकने के लिए विशेष समितियों का गठन किया है। ग्राम स्तरीय समिति में ग्राम विकास अधिकारी, पटवारी, बीट कांस्टेबल और आशा सहयोगिनी शामिल होंगे। तहसील स्तरीय समिति में तहसीलदार, विकास अधिकारी और थानाधिकारी कमान संभालेंगे। वहीं सतर्कता दल के रूप में उपखण्ड अधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे।
विवाह सहयोगियों पर विशेष नजर
आदेश के अनुसार, विवाह संपन्न कराने में सहायक भूमिका निभाने वाले सभी पक्षों को सख्त हिदायत दी गई है।
प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को शादी के कार्ड छापने से पहले वर-वधु की आयु का प्रमाण लेना होगा या कार्ड पर उनकी जन्म तिथि अंकित करनी होगी। हलवाई, टेंट वाले, पंडित, बैंड-बाजे वाले और ट्रांसपोर्टर से बाल विवाह में सहयोग न करने का आश्वासन लिया जाएगा। प्रचार-प्रसार के लिए अटल सेवा केंद्रों, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर जागरूकता सामग्री प्रदर्शित की जाएगी। आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध परिवारों में पहले समझाइश की जाएगी, न मानने पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। बाल विवाह की सूचना मिलने पर संबंधित उपखण्ड अधिकारी (बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी) की जवाबदेही तय की गई है।
जिला मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह श्बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 का गंभीर उल्लंघन है। सूचना प्राप्त होने पर पुलिस और प्रशासन को तुरंत कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने में सहयोग करें और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के साथ खिलवाड़ न होने दें।

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