जनजाति छात्रावास के 50 बच्चों की सुरक्षा पर संकट, भ्रष्ट निर्माण पर उठे सवाल
जुगल कलाल
डूंगरपुर, 7 अप्रैल: ओबरी स्थित जनजाति बालक आश्रम छात्रावास में करोड़ों की लागत से बना नया भवन अब बच्चों के लिए खतरा बन गया है। वर्ष 2024 में 66.15 लाख रुपए की लागत से बने चार कमरे और दो शौचालय पहली बारिश भी नहीं झेल पाए और दीवारों व पिलरों में गहरी दरारें उभर आई हैं। हैरानी की बात यह है कि इस भवन का लोकार्पण 18 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने वर्चुअली किया था।
निर्माण में लापरवाही, घटिया सामग्री के आरोप
यह निर्माण राजस्थान स्टेट कृषि विपणन बोर्ड की देखरेख में श्री विनायक कंस्ट्रक्शन को दिया गया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके चलते भवन की गुणवत्ता शुरुआती दौर में ही सामने आ गई। अभी तक एक मानसून भी नहीं झेल पाए इस भवन की स्थिति चिंताजनक है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल
लोकार्पण पट्टिका पर सांसद राजकुमार रोत और विधायक शंकरलाल देचा के नाम दर्ज हैं, लेकिन भवन की हालत ने उनकी निगरानी और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि क्या बिना जांच के केवल औपचारिक उद्घाटन कर दिया गया?
जिम्मेदारों का बचाव, जांच के निर्देश
कृषि विपणन बोर्ड के एक्सईएन एम. कुमार सालवी ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच की बात कही है, जबकि जनजाति विभाग के उपायुक्त डॉ. सत्य प्रकाश कच्छवाहा ने भी तत्काल सुधार का आश्वासन दिया है। हॉस्टल वार्डन ने पहले ही शिकायत करने की बात कहते हुए बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।