आदिवासी अंचल में उम्मीद की नई फसल: कम जमीन में ज्यादा आय का मंत्र

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कंदवर्गीय फसलों और सफेद मूसली पर प्रशिक्षण, किसानों में बढ़ा उत्साह
उदयपुर, 7 अप्रैल:
उदयपुर के आदिवासी अंचलों में कृषि के जरिए आय बढ़ाने की दिशा में एक नई पहल ने उम्मीद जगाई है। संसदीय संकुल विकास परियोजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को कंदवर्गीय फसलों और सफेद मूसली जैसी औषधीय खेती के लाभ बताए गए, जिससे कम जमीन में अधिक आमदनी संभव हो सके।
विद्या भवन कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 40 से अधिक किसान, विशेषकर आदिवासी समुदाय के कृषक और महिलाएं शामिल हुईं। सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत ने कहा कि बदलते समय में पारंपरिक खेती के साथ औषधीय और उच्च मूल्य वाली फसलें किसानों के लिए स्थायी आय का मजबूत विकल्प बन रही हैं। उन्होंने जोर दिया कि सीमित संसाधनों वाले किसान भी इन फसलों से बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।
सरकारी योजनाओं से आत्मनिर्भरता पर जोर
डॉ. रावत ने किसानों को किसान सम्मान निधि, पीएम कुसुम योजना और “जी राम जी” पहल जैसी योजनाओं का लाभ उठाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा से सिंचाई सुविधाएं बेहतर हो रही हैं, वहीं ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
महिलाओं की भागीदारी और तकनीकी प्रशिक्षण पर फोकस
कार्यक्रम में महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष जोर देते हुए सिलाई प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता के प्रयासों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीज, जैविक खेती और बाजार से जुड़ाव के तरीकों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।