आचार्य कल्प पुण्य सागरजी की सन्निधि में समाधि मरण, अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल
उदयपुर, 18 अप्रैल: वात्सल्य निधि आचार्य कल्प पुण्य सागर जी महाराज के संघस्थ शिष्य मुनि उपकार सागर जी महाराज का शनिवार प्रातः अडिंदा पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र में समाधि मरण हो गया। आचार्यश्री की सन्निधि में णमोकार मंत्र श्रवण करते हुए मुनिश्री ने पंचतत्व में विलीन होकर समाधि मरण प्राप्त किया। उनके देवलोकगमन के बाद शनिवार को चकडोल यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
मुनि उपकार सागरजी ने मुनि दीक्षा के बाद से ही अन्न का त्याग कर केवल जल और नारियल पानी ग्रहण किया तथा अंतिम समय संलेखना पूर्वक समाधि धारण की। आचार्य कल्प पुण्य सागरजी एवं संघस्थ संत लगातार उनके साथ रहे। मुनिश्री के गृहस्थ जीवन के पौत्र काव्य सेठ और पौत्री धरा सेठ ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में परिवारजन, संघ के संत और बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। प्रवक्ता मुकेश पांड्या ने बताया कि शाम को आचार्यश्री संघ का विहार अडिंदा पार्श्वनाथ मंदिर से गुडली की ओर हुआ।