उदयपुर में संगोष्ठी आयोजित, विशेषज्ञों ने संघर्ष और आपदाओं में विरासत बचाने पर दिए सुझाव
उदयपुर, 18 अप्रैल: विश्व धरोहर दिवस 2026 के अवसर पर भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र, उदयपुर तथा जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ के साहित्य संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इस वर्ष की थीम “संघर्ष और आपदाओं में धरोहर संरक्षण” रही, जिसमें विशेषज्ञों ने सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण की आवश्यकता पर विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत उप निदेशक डॉ. निलांजन खटुआ के स्वागत भाषण से हुई, जबकि निदेशक प्रो. बी. वी. शर्मा ने धरोहर संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। शैक्षणिक सत्र में विशेषज्ञों ने राजस्थान के भू-धरोहर स्थलों, संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं से विरासत को होने वाले नुकसान तथा कला और संस्कृति के संरक्षण जैसे विषयों पर व्याख्यान दिए। वक्ताओं ने जावर खनन धरोहर, अकल वुड फॉसिल पार्क और अरावली पर्वतमाला जैसे उदाहरणों के माध्यम से संरक्षण के विभिन्न आयामों पर चर्चा की।
कार्यक्रम में लोक कला मंडल की श्रीमती शालू वर्मा ने लोकगीत प्रस्तुति देकर सांस्कृतिक रंग बिखेरे। अंत में धरोहर संरक्षण के लिए जनजागरूकता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता बढ़ाने पर बल दिया गया।