सांसद की शिकायत के बाद कार्रवाई: प्रतापगढ़ और डूंगरपुर कलेक्टर हटाए गए

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संसद में मुद्दा उठने के 5 दिन में तबादले, डीएमएफ और दिशा बैठक विवाद बना कारण
उदयपुर, 1 अप्रैल:
राजस्थान में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने प्रतापगढ़ और डूंगरपुर के कलेक्टरों का तबादला कर दिया है। यह कार्रवाई सांसद डॉ. मन्नालाल रावत द्वारा मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को शिकायत करने तथा संसद में मुद्दा उठाने के महज पांच दिन बाद सामने आई है।
प्रतापगढ़ कलेक्टर अंजलि राजौरिया को जयपुर सचिवालय भेजा गया है, जबकि डूंगरपुर कलेक्टर अंकित कुमार को सीमावर्ती फलोदी जिले में स्थानांतरित किया गया है।
डीएमएफ कार्यों को लेकर विवाद बना मुख्य कारण
प्रतापगढ़ में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) के तहत स्वीकृत 54 विकास कार्यों में से केवल 3 को ही मंजूरी देने पर विवाद खड़ा हुआ था। जबकि राज्य सरकार पहले ही इन कार्यों को वित्तीय स्वीकृति दे चुकी थी।
सांसद डॉ. रावत ने आरोप लगाया कि कलेक्टर ने जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा को नजरअंदाज किया और “दंभ व अहंकार” के चलते विकास कार्यों को रोका। यह मामला 27 मार्च को संसद में भी उठाया गया था।
डूंगरपुर में दिशा बैठक में टकराव
डूंगरपुर में दिशा समिति की बैठक के दौरान सांसदों के बीच विवाद और कलेक्टर की निष्क्रिय भूमिका भी तबादले का कारण बनी। आरोप है कि बैठक में एजेंडा से बाहर चर्चा होने पर कलेक्टर ने हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे विवाद बढ़ा। सांसद डॉ. रावत ने इस पर भी आपत्ति दर्ज कराते हुए उच्च स्तर पर शिकायत की थी। सूत्रों के अनुसार, सांसद द्वारा मामला संसद की विशेषाधिकार समिति में ले जाने की तैयारी के बीच ही राज्य सरकार ने त्वरित निर्णय लेते हुए दोनों अधिकारियों को हटा दिया।