आहाड़ म्यूज़ियम बना चेतावनी का प्रतीक, इतिहास से सीखने की जरूरत

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प्रो. महेश शर्मा बोले: आयड़ नदी को नाले में बदलना प्रकृति से खिलवाड़
उदयपुर, 19 मई:
उदयपुर का ओपन आहाड़ म्यूज़ियम अब केवल पुरातात्विक धरोहर नहीं, बल्कि आधुनिक शहरी नियोजन के लिए चेतावनी का प्रतीक बनकर सामने आ रहा है। इतिहासकार प्रो. महेश शर्मा ने कहा कि हजारों वर्ष पुरानी आहाड़ सभ्यता जिस आयड़ नदी के किनारे विकसित हुई और कई बार बाढ़ से उजड़ी, आज उसी नदी को 9 मीटर की नाली में सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह प्रकृति और इतिहास दोनों के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
प्रो. शर्मा ने कहा कि आहाड़ म्यूज़ियम मेवाड़ की सभ्यता, संस्कृति और विनाश के कारणों का जीवंत दस्तावेज है। संग्रहालय में मौजूद पुरावशेष यह संदेश देते हैं कि सभ्यताएं केवल निर्माण से नहीं, बल्कि गलत निर्णयों से भी समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी और प्रशासनिक योजनाओं में आयड़ नदी के प्राकृतिक स्वरूप को समझने के बजाय केवल “सौंदर्यीकरण परियोजना” के रूप में देखा गया।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष आने वाली बाढ़ प्रकृति का स्पष्ट संकेत है, लेकिन करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद योजनाओं की सोच नहीं बदली। ऐतिहासिक दीवारों, पारंपरिक निर्माणों और विरासत संरचनाओं को हटाकर विकास के नाम पर प्रकृति के संतुलन की अनदेखी की जा रही है।
प्रो. शर्मा के अनुसार आहाड़ म्यूज़ियम केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि भविष्य का आईना भी है। यदि इतिहास, भूगोल और प्रकृति के संदेशों को नहीं समझा गया तो आने वाली पीढ़ियां वर्तमान शहरों को भी असफल सभ्यता के रूप में संग्रहालयों में देखेंगी। उन्होंने कहा कि वास्तविक विकास वही है, जो प्रकृति, इतिहास और भूगोल के संतुलन के साथ आगे बढ़े।