उदयपुर नगर निगम चुनाव में 80 वार्डों के 220 प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर; डेढ़ लाख से अधिक युवा मतदाता तय करेंगे हार-जीत का गणित
उदयपुर, 10 सितंबर: उदयपुर नगर निगम के चुनाव में भाजपा का अब तक दबदबा रहा है। पिछले 30 साल में नगर निगम में छह बार भाजपा का बोर्ड बना और हर बार भाजपा के पार्षदों की संख्या कांग्रेस से अधिक रही। इस बार मेयर पद अनारक्षित होने से कई बड़े राजनीतिक चेहरे भी पार्षद का चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में नगर निगम की सत्ता पर कब्जे को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला अहम माना जा रहा है।
नगर निगम के 80 वार्डों में पार्षद पद के लिए गुरुवार को मतदान होगा। चुनाव मैदान में कुल 220 प्रत्याशी हैं। इनमें भाजपा और कांग्रेस के 160 प्रत्याशी शामिल हैं, जबकि अन्य प्रत्याशी भारत आदिवासी पार्टी, माकपा और निर्दलीय हैं। 80 में से 39 वार्ड ऐसे हैं, जहां सीधे भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला है।
डेढ़ लाख से अधिक युवा मतदाता
इस चुनाव में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। नगर निगम क्षेत्र में 35 प्रतिशत मतदाता 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों की नजर युवा मतदाताओं पर है। स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ के साथ युवा मतदाताओं का रुझान चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
पार्षद चुनाव के परिणाम 14 सितंबर को घोषित होंगे। इसके बाद 21 सितंबर को मेयर और 22 सितंबर को डिप्टी मेयर का चुनाव होगा। मेयर पद इस बार अनारक्षित है, इसलिए दोनों दलों में कई दावेदारों की नजर निगम के शीर्ष पद पर भी है।
भाजपा में इन नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर
डॉ. मन्नालाल रावत: उदयपुर से भाजपा सांसद हैं। नगर निगम में अब तक छह बार भाजपा का बोर्ड बन चुका है। ऐसे में इस बार भी भाजपा का बोर्ड बरकरार रखने की चुनौती है।
गजपाल सिंह राठौड़: शहर भाजपा जिलाध्यक्ष के तौर पर टिकट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका रही। भाजपा के गढ़ माने जाने वाले शहर में दोबारा बोर्ड बनाने की जिम्मेदारी उनके सामने है।
फूलसिंह मीणा: उदयपुर ग्रामीण विधायक हैं। टिकट वितरण में उनकी भूमिका रही है। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आने वाले वार्डों में अधिक से अधिक भाजपा प्रत्याशियों को जिताने की चुनौती है।
ताराचंद जैन: उदयपुर शहर विधायक हैं। टिकट वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका रही और शहरी विधानसभा क्षेत्र के वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों को जीत दिलाने की जिम्मेदारी है।
कांग्रेस में इनकी प्रतिष्ठा दांव पर
फतहसिंह राठौड़: शहर कांग्रेस जिलाध्यक्ष हैं और टिकट वितरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके सामने पहली बार उदयपुर नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बनाने की चुनौती है।
रघुवीर सिंह मीणा: उदयपुर देहात कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व सांसद हैं। नगर निगम के 36 वार्ड देहात क्षेत्र में आते हैं। टिकट वितरण में उनकी अहम भूमिका रही, ऐसे में इन वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों का प्रदर्शन उनके लिए भी महत्वपूर्ण होगा।
14 सितंबर को साफ होगी तस्वीर
नगर निगम चुनाव में भाजपा अपने पुराने दबदबे को कायम रखने के प्रयास में है, जबकि कांग्रेस के सामने लंबे समय से चली आ रही भाजपा की बढ़त को तोड़कर बोर्ड बनाने की चुनौती है। 80 वार्डों के परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मतदाताओं ने किस दल को बहुमत के करीब पहुंचाया। इसके बाद मेयर पद के चुनाव में पार्षदों की भूमिका निर्णायक होगी।