सुविवि एकेडमिक काउंसिल की बैठक: सिक्किम और उज्जैन के बोर्डों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में प्रवेश की मंजूरी, एमए हिन्दू स्टडीज पाठ्यक्रम को भी मिली स्वीकृति
उदयपुर, 9 सितंबर: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल की बैठक मंगलवार को स्वर्ण जयंती अतिथि गृह सभागार में कुलगुरु प्रोफेसर कैलाश डागा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने, विद्यार्थियों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराने और विभिन्न संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
विश्वविद्यालय प्रवक्ता डॉ. कुंजन आचार्य ने बताया कि बैठक में देसी एवं विदेशी भाषाओं के अध्ययन-अध्यापन को बढ़ावा देने के लिए स्वतंत्र भाषा केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया। केंद्र में विभिन्न भाषाओं के शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों को भी लाभ मिलेगा।
बोर्ड ऑफ ओपन स्कूलिंग एंड स्किल एजुकेशन, सिक्किम के आग्रह पर उसके विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय में मान्यता दी गई। इसी तरह महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड, उज्जैन से कक्षा 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थियों को भी उच्च अध्ययन के लिए मान्य किया गया।
नए पाठ्यक्रम और नियमावली को मंजूरी
कंप्यूटर विज्ञान के विभिन्न पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए आरकेट के साथ हुए एमओयू को जारी रखने की स्वीकृति दी गई। डीएससी, डी.लिट., एलएलडी सहित अन्य पाठ्यक्रमों के लिए नई नियमावली पारित की गई। वहीं एमए हिन्दू स्टडीज पाठ्यक्रम शुरू करने को भी मंजूरी मिली।
दोहरी डिग्री और माइग्रेशन प्रक्रिया स्पष्ट
यूजीसी के नए नियमों के तहत एक विद्यार्थी एक सत्र में नियमित और ओपन विश्वविद्यालय से एक साथ डिग्री कर सकता है। काउंसिल ने ऐसे विद्यार्थियों के माइग्रेशन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए। अब संबंधित विश्वविद्यालय से एनओसी लेकर उसे जमा करना होगा, जिसके बाद नियमानुसार एनरोलमेंट प्रक्रिया पूरी होगी। पहले से एनरोल विद्यार्थियों को रिकॉर्ड जांच के बाद उसी एनरोलमेंट नंबर के तहत पुनः एनरोल किया जाएगा। बैठक में राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक आदान-प्रदान के लिए एमओयू करने की अनुमति भी दी गई। इस दौरान रजिस्ट्रार डॉ. बीसी गर्ग, वित्त नियंत्रक सुरेश जैन, परीक्षा नियंत्रक डॉ. मुकेश बारबर सहित विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता और विभागाध्यक्ष मौजूद रहे।