ईरान युद्ध का असर: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी लागत, व्यापारियों-उद्योगों पर दबाव

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उदयपुर में प्लास्टिक पैकिंग सामान 65% तक महंगा
उदयपुर, 22 मार्च:
पश्चिम एशिया में ईरान से जुड़े तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब स्थानीय बाजारों पर भी दिखने लगा है। उदयपुर में प्लास्टिक पैकिंग से जुड़े उत्पादों की कीमतों में 40 से 65 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे छोटे व्यापारियों और उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
व्यापारियों के अनुसार प्लास्टिक उत्पाद सीधे तौर पर पेट्रोकेमिकल्स पर निर्भर होते हैं, जो कच्चे तेल से बनते हैं। युद्ध की स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे प्लास्टिक ग्रेन्यूल्स और रॉ मटेरियल महंगे हो गए हैं। इसका सीधा असर पैकिंग सामग्री जैसे प्लास्टिक बैग, रैपर, कंटेनर और बोतलों की कीमतों पर पड़ा है।
रैनबो पैकिंग के नीरज जैन का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में पैकिंग मटेरियल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। पहले जहां एक किलो प्लास्टिक ग्रेन्यूल्स सस्ता मिल जाता था, अब उसकी कीमत में भारी उछाल आ गया है। पिछले महीने तक 120 से लेकर 150 रुपए प्रति किलोग्राम तक प्लास्टिक पैकिंग का सामान बेचा था। यह पहली बार है जब एक साथ कीमतों में इतनी बढ़ोतरी हुई है। अब ढाई सौ रुपए प्रति किलोग्राम से कोई भी प्लास्टिक पैकिंग सामान नहीं मिल पा रहा।
दवाई सहित अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की पैकिंग लागत बढ़ी
दवाई के थोक विक्रेता चंद्र प्रकाश खंडेलवाल का कहना है कि खाड़ी युद्ध के चलते खाद्य पदार्थ, दवाइयां, कॉस्मेटिक और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की पैकिंग लागत भी बढ़ गई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है। इससे आम उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का भार कीमतों में जोड़ सकती हैं। व्यापारिक संगठनों ने सरकार से राहत देने और वैकल्पिक उपायों पर विचार करने की मांग की है, ताकि स्थानीय उद्योगों को इस वैश्विक संकट के प्रभाव से बचाया जा सके।