विशेष अदालत ने प्रथम दृष्टया साक्ष्यों को माना महत्वपूर्ण, सरकारी वकील राजेश पारीक ने किया जमानत का विरोध
उदयपुर, 15 अक्टूबर: बांसवाड़ा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में रीडर के पद पर कार्यरत संदीप कुमार नानावटी की रिश्वत मामले में जमानत याचिका उदयपुर की विशेष अदालत ने खारिज कर दी। विशेष न्यायाधीश सतीश चंद्र गोदारा ने 15 अक्टूबर को आदेश में रिश्वत मांग से संबंधित बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट और सह-आरोपी से 40 हजार रुपए की बरामदगी सहित उपलब्ध साक्ष्यों को प्रथम दृष्टया महत्वपूर्ण माना।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, चंदा प्रजापत और उनके भाई विकास ने 11 अक्टूबर को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की बांसवाड़ा चौकी में शिकायत दी थी। आरोप था कि एक आपराधिक मामले में चंदा को जमानत मिलने के बावजूद रीडर संदीप कुमार नानावटी और होमगार्ड राहुल चंदेल ने न्यायालयीन मामले में मदद के बदले 70 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। शिकायत के मुताबिक, 30 हजार रुपए पहले दिए जा चुके थे और 40 हजार रुपए शेष मांगे गए थे।
ब्यूरो ने 11 अक्टूबर को मांग का सत्यापन किया। इसके बाद 12 अक्टूबर को ट्रैप कार्रवाई में होमगार्ड राहुल चंदेल को विकास से 40 हजार रुपए लेते गिरफ्तार किया गया। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि यह राशि रीडर के लिए ली जा रही थी।
जमानत सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुराने लेनदेन के बैंक विवरण प्रस्तुत करते हुए आरोपों को निराधार बताया। विशिष्ट लोक अभियोजक राजेश पारीक ने जमानत का विरोध किया। अदालत ने पाया कि बैंक विवरण में दर्ज लेनदेन पुराने थे और बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट में उधार का उल्लेख नहीं था। अदालत ने इन्हीं परिस्थितियों में जमानत याचिका खारिज कर दी। यह आदेश जमानत आवेदन तक सीमित है।