बीएपी ने फिर प्रभुलाल बुझ को सौंपी जिलाध्यक्ष की कमान

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बांसवाड़ा: बांसवाड़ा में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) ने भंग जिला कार्यकारिणी के बाद फिर प्रभुलाल बुझ को कार्यवाहक जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। आगामी पंचायतीराज चुनावों को देखते हुए पार्टी ने यह जिम्मेदारी 31 दिसंबर 2026 तक के लिए सौंपी है। इससे पहले टिकट वितरण में गड़बड़ियों और कुछ सीटों पर बेहद कम मतदान आंकड़े सामने आने के बाद जिला कार्यकारिणी भंग की गई थी। इसके बाद पार्टी ने कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों से राय ली। पुरानी कार्यप्रणाली और अनुभवी चेहरों को प्राथमिकता देने की राय के बाद प्रभुलाल को दोबारा जिम्मेदारी दी गई। पार्टी नेतृत्व के अनुसार अगले कुछ दिनों में स्थानीय स्तर पर अन्य सांगठनिक फेरबदल और नियुक्तियां भी की जाएंगी।


त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में 11 अक्टूबर को घट स्थापना
बांसवाड़ा:
शक्तिपीठ मां त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में अश्विन नवरात्र महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट और व्यवस्थापक मंडल पंचाल समाज चौदह चोखरा की बैठक हुई। इसमें दर्शन, सुरक्षा, पार्किंग, सफाई, विद्युत, पेयजल और भीड़ प्रबंधन सहित व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपने का निर्णय लिया गया। 11 अक्टूबर को घट स्थापना दोपहर 12:01 से 12:47 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में होगी। पूजन सुबह 10:30 बजे लाभ और अमृत चौघड़िया में शुरू होगा। नवरात्र के दौरान रात 12 बजे तक दर्शन की व्यवस्था रहेगी। 10 अक्टूबर को अंतिम समीक्षा बैठक होगी।


घंटाली में 48 किलो डोडाचूरा जब्त
प्रतापगढ़ :
प्रतापगढ़ में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए घंटाली पुलिस और डीएसटी ने 48 किलो 169 ग्राम डोडाचूरा जब्त किया। पुलिस ने बिचलापाड़ा घाटी में नाकाबंदी के दौरान मिनी लोडिंग टेम्पो को रोका। उसके पीछे डाले के नीचे विशेष रूप से बनाई गई जगह में 10 कट्टों में डोडाचूरा भरा था। पुलिस ने तस्करी में एस्कॉर्ट के लिए इस्तेमाल बिना नंबर की बाइक भी जब्त की। मामले में ओमप्रकाश (35), दिनेश (30) और लखमीचंद (45) को गिरफ्तार किया गया। जब्त डोडाचूरा की अनुमानित कीमत 7 लाख 25 हजार रुपए बताई गई है। पुलिस आरोपियों से तस्करी नेटवर्क को लेकर पूछताछ कर रही है।


चूहों का शिकार करने आया कोबरा खुद पिंजरे में फंसा
राजसमंद:
चिरवा के पास बिकरनी गांव स्थित संत आश्रम में चूहों का शिकार करने पहुंचा कोबरा खुद पिंजरे में कैद हो गया। आश्रम में चूहों को पकड़ने के लिए लगाए पिंजरे में रोटी रखी गई थी। रात में तीन चूहे पिंजरे में कैद हुए तो कोबरा वहां पहुंच गया और तीनों को निगल लिया। इसके बाद वह खुद पिंजरे से बाहर नहीं निकल सका। सुबह सेवकों ने सांप को फंसा देखा और पिपरड़ा निवासी वन्यजीव प्रेमी नवीन गहलोत को सूचना दी। गहलोत ने कोबरा को सुरक्षित बाहर निकालकर डिब्बे में रखा। इस दौरान सांप ने तीनों चूहों को वापस उगल दिया। बाद में उसे जंगल में छोड़ दिया गया।