बोले- सरकारी काम में जाति के नाम पर भेदभाव नहीं होना चाहिए
कोविड काल में डिप्टी मेयर रहते निभाई जनसेवा की जिम्मेदारी, गुलाबचंद कटारिया को मानते हैं राजनीतिक प्रेरणास्रोत; पिता को बताया आदर्श
उदयपुर, 16 सितंबर: उदयपुर नगर निगम के महापौर पद के लिए भाजपा प्रत्याशी पारस सिंघवी से उनके राजनीतिक सफर, प्रेरणास्रोत, संघर्ष और जनसेवा को लेकर बातचीत हुई। सिंघवी ने छात्र जीवन से राजनीति में आने से लेकर डिप्टी मेयर रहते कोविड काल में किए गए कार्यों और राजनीति में आने वाले युवाओं को लेकर अपनी सोच साझा की।
सवाल : राजनीति में आपका सफर कैसे शुरू हुआ?
पारस सिंघवी: बचपन से ही मेरा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव रहा। कम उम्र से ही राजनीति की ओर रुचि थी। कॉलेज में छात्र परिषद का अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़ा और धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति में काम शुरू किया। इसी सफर में लोगों के बीच काम करने का अवसर मिला।
सवाल : आपकी शैक्षणिक और सामाजिक पृष्ठभूमि क्या रही है?
सिंघवी: मैं उदयपुर का रहने वाला हूं। श्रमजीवी कॉलेज से बीकॉम किया है। राजनीति के साथ सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्र में भी काम किया। उदयपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई है।
सवाल : राजनीति में आपका प्रेरणास्रोत कौन है?
सिंघवी: गुलाबचंद कटारिया को मैं राजनीतिक क्षेत्र में अपना प्रेरणास्रोत मानता हूं। उनके राजनीतिक जीवन और काम से मुझे प्रेरणा मिली है। वहीं मेरे पिता मेरे लिए आदर्श रहे हैं। वे आदर्शवादी और ईमानदार व्यक्ति थे तथा संकट के समय लोगों की मदद करते थे।
सवाल : आपके जीवन का सबसे कठिन दौर कौन सा रहा?
सिंघवी: पिता का निधन मेरे जीवन का सबसे दर्दनाक और चुनौतीपूर्ण समय था। उस घटना से मैं पूरी तरह टूट गया था। लेकिन दोस्तों के सहयोग और हिम्मत के साथ दोबारा खड़ा हुआ और अपनी जिम्मेदारियां संभालीं।
सवाल : कोविड काल में डिप्टी मेयर के रूप में आपका अनुभव कैसा रहा?
सिंघवी: कोविड का समय सभी के लिए बहुत कठिन था। इससे पहले किसी ने ऐसी महामारी नहीं देखी थी। उस समय डिप्टी मेयर के रूप में जनता की सेवा करना मेरी जिम्मेदारी थी। सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से जरूरतमंद और असहाय लोगों के बीच भोजन के पैकेट भी वितरित किए।
सवाल : सरकारी काम में जाति के आधार पर भेदभाव को लेकर आपकी क्या सोच है?
सिंघवी: किसी भी सरकारी काम में किसी भी कीमत पर जाति के नाम पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है कि वह सभी लोगों के साथ समान व्यवहार करे और बिना किसी भेदभाव के काम करे।
सवाल : राजनीति में आने वाले युवाओं को संदेश
सिंघवी: जो युवा राजनीति में करियर बनाना चाहते हैं, उन्हें जरूर इस क्षेत्र में आना चाहिए। राजनीति में कई चुनौतियां होती हैं, लेकिन अच्छे काम के लिए रास्ता बनाया जा सकता है। हर व्यक्ति राजनीति में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए नहीं आता। यदि उद्देश्य लोगों की सेवा करना है और सोच प्रगतिशील है तो राजनीति का हिस्सा बनकर व्यवस्था में बदलाव के लिए काम किया जा सकता है।