मतदान बाद के आकलन में भाजपा 58, कांग्रेस 18 और अन्य 4 वार्ड में आगे; मेयर की कुर्सी को लेकर अभी से लॉबिंग तेज
उदयपुर, 11 सितंबर: उदयपुर नगर निगम चुनाव में मतदान समाप्त होने के बाद अब प्रत्याशियों के साथ राजनीतिक दलों ने भी जीत-हार का गुणा-भाग शुरू कर दिया है। 80 वार्डों में 220 प्रत्याशियों का सियासी भविष्य ईवीएम में कैद हो चुका है। मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 11 प्रतिशत बढ़ने से भाजपा और कांग्रेस दोनों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। मतदान के बाद सामने आए राजनीतिक आकलन में भाजपा का बोर्ड बनता नजर आ रहा है। अनुमान के अनुसार भाजपा करीब 58 वार्डों में जीत दर्ज कर सकती है, जबकि कांग्रेस के खाते में करीब 18 और अन्य के खाते में 4 वार्ड जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि वास्तविक तस्वीर 14 सितंबर को मतगणना के बाद ही साफ होगी।
2019 के चुनाव में उदयपुर नगर निगम में 57.81 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार मतदान 68 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है। अधिकृत अंतिम आंकड़े आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। भाजपा ने इस चुनाव में 60 पार का लक्ष्य लेकर चुनाव लड़ा और सातवीं बार बोर्ड बनाने का दावा किया। वहीं कांग्रेस ने भाजपा का किला ढहाकर अपना बोर्ड बनाने का दावा किया था।
कटारिया के मतदान नहीं करने की चर्चा
इस बार पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया मतदान करने नहीं पहुंचे। राज्यपाल बनने के बाद विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उदयपुर आकर मतदान करने वाले कटारिया के इस बार वोट नहीं डालने की शहर में चर्चा रही।
कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
परिणाम के साथ कई प्रमुख नेताओं और उनके परिजनों की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई है। भाजपा के पूर्व उपमहापौर पारस सिंघवी और सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रमोद सामर की जीत को लेकर पार्टी कार्यकर्ता आश्वस्त नजर आए। पूर्व शहर अध्यक्ष दिनेश भट्ट के वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशी ने मुकाबला रोचक बनाए रखा, हालांकि भाजपा का पलड़ा भारी माना जा रहा है। कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ की पत्नी डॉ. पूनम कुंवर के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास के भाई की बहू डॉ. हितांशी शर्मा की जीत की संभावना की चर्चा है।
निगम में पहली बार शामिल हुए क्षेत्रों के वार्डों में भी रोचक मुकाबला देखने को मिला। बड़गांव के वार्ड 1 में पूर्व सरपंच संजय शर्मा, बेदला के वार्ड 80 में भाजपा मंडल अध्यक्ष एवं पूर्व उपप्रधान प्रताप सिंह राठौड़ की जीत को लेकर चर्चा है, वहीं शोभागपुरा के वार्ड 76 में भाजपा की पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. कविता जोशी और कांग्रेस की इंद्रा डांगी के बीच कांटे की टक्कर रही। वार्ड 75 में पूर्व उपमहापौर महेंद्र सिंह शेखावत भी कड़े मुकाबले में बताए जा रहे हैं।
मेयर की कुर्सी के लिए अभी से लॉबिंग
बोर्ड बनने के अनुमान के साथ ही भाजपा में मेयर पद के दावेदारों ने भी अपनी-अपनी गणित बैठानी शुरू कर दी है। प्रमोद सामर, दिनेश भट्ट, अतुल चंडालिया और पारस सिंघवी के नाम प्रमुख दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं। पार्टी स्तर पर पार्षदों से चर्चा के बाद नाम पर फैसला होने की संभावना है, लेकिन दावेदार अपनी ओर से जयपुर से दिल्ली तक संपर्क साधने में जुटे हैं।कांग्रेस में भी यदि पार्टी अपेक्षित संख्या में पार्षद जीतती है तो डॉ. पूनम कुंवर और डॉ. हितांशी शर्मा के नाम चर्चा में रह सकते हैं। अरुण टांक भी पिछली बार की तरह मेयर पद को लेकर सक्रिय बताए जा रहे हैं।
बाड़ाबंदी की तैयारी शुरू
मतदान समाप्त होते ही भाजपा और कांग्रेस अपने प्रत्याशियों के साथ बैठकर वार्डवार जीत-हार का आकलन कर रहे हैं। भाजपा ने अपने सभी 80 प्रत्याशियों को देर शाम एक होटल में बुलाया है। इसके बाद जीतने वाले पार्षदों को महापौर चुनाव तक एकजुट रखने के लिए बाड़ाबंदी की रणनीति पर भी काम शुरू होने की चर्चा है। ऐसे में 14 सितंबर की मतगणना केवल बोर्ड की तस्वीर ही नहीं, बल्कि मेयर की दौड़ का पहला बड़ा पड़ाव भी साबित होगी।