उदयपुर में’बोर गणेशजी’ से बने ‘बोहरा गणेश’

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350 से 500 वर्ष पुराने मंदिर में नृत्य मुद्रा में विराजमान हैं गणपति, जरूरत के समय धन मिलने की मान्यता से पड़ा ‘बोहरा गणेश’ नाम
उदयपुर, 13 सितम्बर:
झीलों की नगरी उदयपुर की धार्मिक पहचान में बोहरा गणेश मंदिर का विशेष स्थान है। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के समीप स्थित इस प्राचीन मंदिर को करीब 350 से 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। मंदिर की सबसे खास विशेषता यहां नृत्य मुद्रा में विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा है। गणेशजी के इस स्वरूप के दर्शन के लिए वर्षभर श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मंदिर के नाम से जुड़ी मान्यता भी बेहद रोचक है। इस मंदिर का मूल नाम ‘बोर गणेशजी’ था। कहा जाता है कि पुराने समय में व्यापार, विवाह या अन्य जरूरी कार्यों के लिए धन की आवश्यकता होने पर लोग अपनी जरूरत एक पर्ची पर लिखकर गणेशजी के समक्ष रखते थे। मान्यता के अनुसार उन्हें किसी न किसी माध्यम से आवश्यक धन प्राप्त हो जाता था। बाद में यह धन ब्याज सहित लौटाया जाता था। धन के इस लेन-देन की परंपरा बोहरा समाज से मिलती-जुलती होने के कारण मंदिर का नाम ‘बोहरा गणेश’ पड़ गया।