जापान में कांगितेन, थाईलैंड में फ्रा फिकानेत; इंडोनेशिया के पुराने नोट पर भी थी गणेशजी की तस्वीर
उदयपुर, 13 सितम्बर: भगवान गणेश की मान्यता केवल भारत तक सीमित नहीं रही है। एशिया के कई देशों में वे हिंदू और बौद्ध परंपराओं के अलग-अलग रूपों में दिखाई देते हैं। जापान में गणेश को ‘कांगितेन’ या ‘शोतेन’ के रूप में जाना जाता है और उनका संबंध जापानी बौद्ध परंपरा से है।
थाईलैंड में गणेश ‘फ्रा फिकानेत’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। उन्हें सफलता, कला और बाधाओं को दूर करने से जुड़े देवता के रूप में सम्मान दिया जाता है।
इंडोनेशिया में गणेश ज्ञान और शिक्षा के प्रतीक के रूप में दिखाई देते हैं। देश के 20 हजार रुपिया के पुराने नोट पर भी गणेशजी की तस्वीर प्रकाशित हुई थी, हालांकि वह नोट अब प्रचलन में नहीं है। इंडोनेशिया के कई शिक्षण संस्थानों की पहचान में भी गणेश की छवि देखने को मिलती है।
नेपाल में गणेश ‘विनायक’ परंपरा से जुड़े हैं, जबकि कंबोडिया सहित दक्षिण-पूर्व एशिया के कई क्षेत्रों में प्राचीन हिंदू-बौद्ध कला में गणेश की प्रतिमाएं मिलती हैं। अफगानिस्तान में भी 5वीं से 7वीं शताब्दी के बीच की गणेश प्रतिमाएं मिलने से उस दौर के भारत-अफगान सांस्कृतिक संबंधों का पता चलता है।