सारणेश्वर मंदिर में विप्रजनों ने धारण किया नवीन यज्ञोपवीत

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श्रावणी उपाकर्म में हेमाद्रि स्नान, ऋषि एवं पितृ तर्पण के साथ वैदिक मंत्रोच्चार से संपन्न हुआ आयोजन
डूंगरपुर, 28 अगस्त:
श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर डूंगरपुर शहर के ऐतिहासिक सारणेश्वर मंदिर घाटी में शुक्रवार को श्रावणी उपाकर्म विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। चौबीसा समाज सहित विभिन्न विप्रजनों ने हेमाद्रि स्नान, ऋषि तर्पण और पितृ तर्पण की धार्मिक क्रियाएं पूरी कर नवीन यज्ञोपवीत धारण किया।
चौबीसा समाज अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि आयोजन आचार्य जुगल किशोर पांडेय एवं सहआचार्य कपिल उपाध्याय के आचार्यत्व में हुआ। आचार्यों ने मंत्रोच्चार के साथ उपस्थित विप्रजनों को नवीन यज्ञोपवीत धारण कराया।
जनेऊ के तीन धागे तीन ऋणों के प्रतीक
सुरेंद्र कुमार शर्मा ने हेमाद्रि स्नान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे मन, कर्म और वचन की शुद्धि तथा पापों के निवारण की आराधना बताया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में यज्ञोपवीत धारण करना महत्वपूर्ण संस्कार है। जनेऊ के तीन धागे देव ऋण, पितृ ऋण और ऋषि ऋण के प्रतीक माने जाते हैं और व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का स्मरण कराते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों को परिवार में उचित संस्कार देकर ही परंपराओं को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस अवसर पर सभी से किसी की निंदा नहीं करने तथा प्राणी-पक्षियों के प्रति दयाभाव रखने का संकल्प भी कराया गया।