सीमेंट-कंक्रीट की ‘वॉल टू वॉल’ सड़कें भूजल रिचार्ज में बन रहीं बाधा

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शहरी विकास के बीच जमीन तक नहीं पहुंच पा रहा वर्षा जल, जल विशेषज्ञों ने जताई चिंता
गोपाल लोहार
उदयपुर, 19 जून:
शहरों में तेजी से बन रही ‘वॉल टू वॉल’ सीमेंट-कंक्रीट सड़कों ने भूजल संरक्षण को नई चुनौती दे दी है। आधुनिक शहरी विकास के नाम पर सड़कों को एक छोर से दूसरे छोर तक पूरी तरह पक्का किया जा रहा है, जिससे वर्षा का पानी जमीन में समाने के बजाय सीधे नालों और ड्रेनेज सिस्टम के माध्यम से बाहर निकल जाता है। इसका असर भूजल स्तर पर पड़ रहा है और प्राकृतिक रिचार्ज की प्रक्रिया लगातार कमजोर हो रही है।
जल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में पहले सड़क किनारे कच्ची पट्टियां, खुले क्षेत्र और मिट्टी वाले हिस्से होते थे, जहां बारिश का पानी धीरे-धीरे जमीन में समा जाता था। लेकिन अब अधिकांश सड़कों के दोनों ओर सीमेंट, इंटरलॉकिंग टाइल्स या कंक्रीट बिछा दिए जाने से पानी के लिए धरती तक पहुंचने का रास्ता लगभग बंद हो गया है।
भूजल विशेषज्ञों के अनुसार यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में शहरी क्षेत्रों में जल संकट और गहरा सकता है। बढ़ती आबादी और लगातार जल दोहन के बीच प्राकृतिक रिचार्ज के स्रोत सिकुड़ना चिंता का विषय बनता जा रहा है।
मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में भी उठा मुद्दा
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा सम्मानित ‘वाटर हीरो’ डॉ. पी.सी. जैन ने भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भेजे हालिया खुले पत्र में इस विषय को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि नई सड़कों के निर्माण में ‘वॉल टू वॉल’ कंक्रीटीकरण से बचते हुए दोनों ओर पर्याप्त कच्ची एवं खुली भूमि छोड़ी जाए, ताकि वर्षा जल सीधे जमीन में समा सके और भूजल भंडार को पुनर्भरित कर सके। डॉ. जैन ने पत्र में कहा है कि जल संरक्षण को केवल अभियान नहीं, बल्कि निर्माण और विकास की नीतियों का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि शहरी नियोजन में भूजल रिचार्ज को प्राथमिकता नहीं दी गई तो वर्षा जल संरक्षण के अधिकांश प्रयास सीमित प्रभाव ही छोड़ पाएंगे।