एक ही स्थान पर रहकर करेंगे प्रवचन, तप और स्वाध्याय; पर्यूषण, दशलक्षण और महावीर निर्वाण कल्याणक सहित कई प्रमुख पर्व होंगे आयोजित
उदयपुर, 20 जुलाई: जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण साधना पर्व चातुर्मास इस वर्ष 29 जुलाई से प्रारंभ होगा। वर्षा ऋतु के चार महीनों तक जैन साधु-साध्वियां एक ही स्थान पर निवास कर आत्मसाधना, स्वाध्याय, तप, त्याग और प्रवचनों के माध्यम से समाज में संयम, नैतिकता और सदाचार का संदेश देंगे। इस दौरान मंदिरों, स्थानकों और उपाश्रयों में धार्मिक आराधना, संस्कार शिविर और आध्यात्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चलेगी।
श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र ने बताया कि वर्षा ऋतु में सूक्ष्म जीवों की रक्षा और अहिंसा के सिद्धांत का पालन करते हुए साधु-साध्वियां चातुर्मास के दौरान विहार नहीं करते। उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण और उपभोक्तावादी दौर में चातुर्मास आत्मनिरीक्षण, अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण, जीवदया और सात्विक जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देता है।
चातुर्मास के दौरान पर्यूषण महापर्व, दशलक्षण पर्व, अनंत चतुर्दशी, नवपद आयंबिल ओली, भगवान महावीर निर्वाण कल्याणक और ज्ञान पंचमी जैसे प्रमुख धार्मिक आयोजन होंगे। देश की चार प्रमुख जैन परंपराओं में वर्तमान में 19 हजार से अधिक साधु-साध्वियां धर्म, शिक्षा, अहिंसा और सामाजिक जागरण का कार्य कर रहे हैं, जिनमें श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ के 362 चातुर्मास भी शामिल हैं।