झील संवाद में विशेषज्ञों ने जताई चिंता, जिम्मेदार एजेंसियों की निष्क्रियता पर सवाल0
उदयपुर, 21 जून: मानसून से पूर्व झीलों के जलग्रहण क्षेत्रों, जलप्रवाह मार्गों और किनारों पर जमा कचरे को हटाने की मांग एक बार फिर जोरदार ढंग से उठाई गई है। रविवार को आयोजित झील संवाद में झील संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों ने कहा कि बार-बार आग्रह के बावजूद जिम्मेदार एजेंसियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। संवाद से पूर्व नागा नगरी क्षेत्र में झील पेटे में फैले बदबूदार कचरे को स्वयंसेवकों ने हटाया।
झील संरक्षण समिति के सहसचिव डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि गर्मी और उमस के कारण जैविक कचरे एवं सीवेज मिश्रित अपशिष्ट में रोगजनक बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनप रहे हैं। मानसून की पहली बारिश इन्हें झीलों तक पहुंचा सकती है, जिससे जलजनित रोगों का खतरा बढ़ेगा।
झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेजशंकर पालीवाल ने चेताया कि प्लास्टिक, पॉलीथिन, थर्मोकोल और निर्माण मलबा वर्षाजल के साथ झीलों में पहुंचकर जल गुणवत्ता को प्रभावित करेगा तथा माइक्रोप्लास्टिक के रूप में मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बनेगा।
पर्यावरणविद नंदकिशोर शर्मा और कुशल रावल ने कहा कि जैविक कचरे से निकलने वाले पोषक तत्व जलीय खरपतवारों की अत्यधिक वृद्धि का कारण बनेंगे, जिससे झीलों में घुलित ऑक्सीजन घटेगी और दुर्गंध बढ़ेगी।
वक्ताओं ने नागरिकों, होटल संचालकों, रेस्टोरेंट व्यवसायियों और पर्यटकों से झीलों में कचरा नहीं डालने तथा झील संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।