हवाई सर्वे कर मुख्यमंत्री ने ली प्रगति की जानकारी, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निर्माण के दिए निर्देश
उदयपुर, 22 जून: उदयपुर शहर की भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने वाली बहुप्रतीक्षित देवास-III और देवास-IV पेयजल परियोजनाओं की प्रगति का मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को हवाई सर्वेक्षण कर जायजा लिया। झाड़ोल क्षेत्र में हेलीकॉप्टर से किए गए इस निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन बांधों, सुरंगों तथा विभिन्न कार्य स्थलों का अवलोकन किया और अधिकारियों से परियोजना की वर्तमान स्थिति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
बांधों और सुरंगों का किया अवलोकन
मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वे के दौरान देवास-III और देवास-IV बांधों के डैम एक्सिस तथा टनल निर्माण कार्यों को देखा। उन्होंने टनल-3 के अंतर्गत 3.15 किलोमीटर, 5.325 किलोमीटर तथा 9.10 किलोमीटर एडिट पॉइंट्स सहित विभिन्न निर्माण स्थलों की प्रगति का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की गति, गुणवत्ता और तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
सर्वेक्षण के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों ने परियोजना की प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना से जुड़े सभी कार्य तय समय सीमा में पूर्ण किए जाएं तथा निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए।
उदयपुर की जल सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि देवास-III और देवास-IV परियोजनाएं उदयपुर के भविष्य की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। इन योजनाओं के पूर्ण होने के बाद शहर और आसपास के क्षेत्रों को लंबे समय तक पर्याप्त एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय बढ़ाकर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जल संकट से निपटने के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके पूरा होने से आने वाले वर्षों में उदयपुर को पेयजल की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
झीलों और पर्यटन को भी मिलेगा लाभ
देवास परियोजना केवल पेयजल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उदयपुर की प्रसिद्ध झीलों को भी नया जीवन मिलेगा। परियोजना के माध्यम से पिछोला, फतहसागर और स्वरूपसागर जैसी झीलों का जलस्तर बनाए रखने में मदद मिलेगी। झीलों में पर्याप्त जल उपलब्ध रहने से पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा और पर्यटन उद्योग को भी नई मजबूती प्राप्त होगी।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
देवास-तृतीय योजना के तहत गोगुंदा तहसील के नाथियाथल गांव के निकट 703 एमसीएफटी क्षमता का बांध बनाया जा रहा है। यहां से 10.50 किलोमीटर लंबी सुरंग के माध्यम से पानी देवास-द्वितीय आकोदड़ा बांध तक पहुंचाया जाएगा और वहां से आगे पिछोला झील में प्रवाहित किया जाएगा।
वहीं देवास-चतुर्थ योजना के अंतर्गत गोगुंदा क्षेत्र के अंबावा गांव के पास 390 एमसीएफटी क्षमता का बांध प्रस्तावित है। इसे 4.15 किलोमीटर लंबी सुरंग के माध्यम से देवास-तृतीय बांध से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि परियोजना के लिए आवश्यक वन स्वीकृति केंद्र सरकार से प्राप्त हो चुकी है। निजी भूमि अधिग्रहण के बदले मुआवजा वितरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जबकि प्रभावित परिवारों को विशेष अनुग्रह राशि प्रदान करने संबंधी प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रक्रियाओं को पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।