पिछोला के घटते जलस्तर और गंदगी पर जताई चिंता

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बारी घाट पर श्रमदान कर पारंपरिक जल प्रबंधन व्यवस्था बहाल करने की मांग
उदयपुर, 25 अक्टूबर:
पिछोला झील का घटता जलस्तर, बढ़ती जलीय खरपतवार और किनारों पर फैली गंदगी झील संरक्षण के लिए चुनौती बन रही है। झील के कई हिस्सों में कचरे और मानव मल से फैल रही दुर्गंध पर चिंता जताते हुए रविवार को झील हितैषी नागरिक मंच, भारतीय मानव विज्ञान संरक्षण एवं लोकजन सेवा संस्था के संयुक्त तत्वावधान में बारी घाट पर श्रमदान किया गया।
भारतीय मानव विज्ञान संरक्षण के नीलांजन खटुआ, उमेश शंकर शर्मा, डॉ. जयराज आचार्य और जय किशन चौबे ने कहा कि झील के गिरते जलस्तर और बढ़ती खरपतवार के साथ गंदगी की समस्या पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
मंच संयोजक हाजी सरदार मोहम्मद, कमलेश पुरोहित, सतीश मेवाड़ा और किशोर गहलोत ने कहा कि महाराणाओं के समय विकसित पारंपरिक जल प्रबंधन व्यवस्था में झीलों और बावड़ियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता था। उन्होंने इस व्यवस्था को पुनर्जीवित कर ऐतिहासिक जलस्रोतों की स्वच्छता और उपयोगिता बढ़ाने का आग्रह किया। श्रमदान में मनोहर मूंदड़ा, सुरेश तमोली, गोविंद ओड़ सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।