80 फीसदी से अधिक लाभार्थियों वाले वार्ड रडार पर, उदयपुर जिले के पांच वार्डों में सर्वे शुरू; पात्र जरूरतमंदों को भी जोड़ेंगे
उदयपुर, 10 अक्टूबर: खाद्य सुरक्षा योजना में अपात्र होते हुए भी मुफ्त गेहूं उठाने वाले लाभार्थियों की अब घर-घर जांच होगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक सर्वे अभियान शुरू किया है। इसके तहत उदयपुर जिले के उन शहरी वार्डों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां वर्ष 2011 की जनगणना के मुकाबले 80 प्रतिशत से अधिक लोग खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ उठा रहे हैं।
जिले में फतहनगर-सनवाड़ नगर पालिका के वार्ड संख्या 1, 5, 9 और 10 तथा मावली के वार्ड संख्या 1 में सर्वे शुरू हो गया है। जिला रसद अधिकारी की ओर से गठित जांच दल घर-घर जाकर लाभार्थियों की पात्रता की पड़ताल कर रहे हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के निर्धारित मानदंडों के अनुसार योजना का लाभ लेने के पात्र हैं या नहीं।
अपात्रों को नाम हटाने के लिए करेंगे प्रेरित
सर्वे में बहिष्करण श्रेणी में आने वाले लोगों की पहचान की जाएगी। निर्धारित नियमों के तहत अपात्र पाए जाने वाले लाभार्थियों को स्वेच्छा से योजना छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। यह कार्रवाई ‘गिवअप अभियान 2.0’ के तहत होगी। नाम नहीं हटाने वाले अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ नियमानुसार नोटिस जारी करने सहित आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
पात्र परिवारों को भी मिलेगा मौका
अभियान का उद्देश्य केवल अपात्रों के नाम हटाना नहीं, बल्कि ऐसे जरूरतमंद परिवारों को योजना से जोड़ना भी है, जो पात्र होने के बावजूद अब तक सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं। ऐसे परिवारों के आवेदन की प्रक्रिया पूरी करवाई जाएगी।
जिला रसद अधिकारी मणि खींची के अनुसार, अभियान की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और चयनित वार्डों के लाभार्थियों की सूची जांच दलों को उपलब्ध करवा दी गई है। सर्वे निर्धारित अवधि में पूरा किया जाएगा।
हर महीने मिलता है प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहूं
खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र लाभार्थियों को हर महीने प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहूं मुफ्त दिया जाता है। इसके अतिरिक्त संबंधित पात्रता के अनुसार राज्य सरकार की रसोई गैस सब्सिडी, स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा योजनाओं का लाभ भी मिल सकता है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अपात्रों के बजाय वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे।