फतहसागर पाल की पहाड़ियों में दरारें, बड़े भूस्खलन का खतरा

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उदयपुर, 3 मई: झीलों की नगरी उदयपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल फतहसागर झील की पाल से सटी पहाड़ियों में गहरी दरारें उभरने से बड़े हादसे की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार ये दरारें सड़क के समानांतर विकसित हो रही हैं, जिससे भारी चट्टानों की पकड़ कमजोर हो गई है और किसी भी समय भूस्खलन की घटना हो सकती है।
भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि यह क्षेत्र अरावली पर्वतमाला का हिस्सा है, जहां की चट्टानें अत्यंत प्राचीन और पहले से ही दरारयुक्त हैं। पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी वर्षा के कारण पानी इन दरारों में समाकर चट्टानों को और कमजोर कर रहा है। परिणामस्वरूप पत्थरों के खिसकने और गिरने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। मॉर्निंग और इवनिंग वॉक पर आने वाले लोगों ने कई बार छोटे पत्थर गिरने की शिकायत भी की है।
गौरतलब है कि भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने वर्ष 2012 में ही जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपकर इस खतरे के प्रति आगाह किया था, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
इंजीनियरिंग जियोलॉजिस्ट वी.पी. शर्मा और राजेश शर्मा ने प्रशासन से मानसून से पहले ‘युद्ध स्तर’ पर सुरक्षा कार्य करने की मांग की है। उन्होंने चट्टानों की नेटिंग, बोल्टिंग और संवेदनशील क्षेत्रों में बैरिकेडिंग जैसे उपाय तत्काल लागू करने पर जोर दिया है।
स्थानीय राहुल शर्मा का कहना है, “हम रोज यहां टहलने आते हैं, लेकिन अब डर बना रहता है कि कब पत्थर गिर जाए।” वहीं, क्षेत्र की निवासी कविता जोशी ने बताया कि “पर्यटकों की भीड़ रहती है, ऐसे में बड़ा हादसा हुआ तो स्थिति गंभीर हो सकती है।” विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले मानसून में स्थिति और भयावह हो सकती है, जिससे जान-माल की भारी हानि से इनकार नहीं किया जा सकता।