मृत व्यक्ति को कागजों में दिखाया जिंदा, कोर्ट ने लिया संज्ञान

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एसडीएम सहित कई अधिकारियों पर फर्जीवाड़े का मामला, जमानती वारंट जारी
मंडफिया, 3 मई (विवेक शर्मा):
चित्तौड़गढ़ जिले के भदेसर क्षेत्र से जुड़े एक बहुचर्चित राजस्व विवाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट मंडफिया ने चौंकाने वाला आदेश पारित करते हुए तत्कालीन उपखंड अधिकारी (एसडीएम), तहसीलदार और अन्य कार्मिकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में प्रथम दृष्टया अपराध माना है। मामले में मृत व्यक्ति को कागजों में जिंदा दिखाकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप है। न्यायालय ने परिवाद, दस्तावेजों और पुलिस जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रसंज्ञान लेते हुए आरोपियों के विरुद्ध जमानती वारंट जारी किए हैं।
मृत व्यक्ति को अपील में बनाया पक्षकार
परिवादकर्ता शंकरलाल गाडरी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2010 से चल रहे भूमि विवाद में उनके पक्ष में फैसला आने के बाद विरोधी पक्ष ने मिलीभगत कर दोबारा अपील दायर करवाई। आरोप है कि अपील में ऐसे व्यक्ति को पक्षकार बनाया गया, जिसका रिकॉर्ड से कोई संबंध नहीं था। सबसे गंभीर आरोप यह है कि वर्ष 2012 में मृत हो चुके नारू गाडरी को अपील में जीवित दर्शाया गया और उनकी ओर से “तामील लेने से इंकार” की रिपोर्ट तैयार कर दी गई।
कोरोना काल में फर्जी तामील और एकपक्षीय निर्णय
परिवाद में यह भी उल्लेख है कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान कथित रूप से फर्जी तामीले तैयार कर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर एकपक्षीय सुनवाई की गई और निर्णय पारित कर दिया गया। इससे पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस जांच में मिली गंभीर विसंगतियां
भदेसर पुलिस वृत्त की जांच में तामीले फर्जी और कूटरचित पाई गईं। जांच रिपोर्ट के अनुसार संबंधित दस्तावेज कार्यालय की पंजिकाओं में दर्ज नहीं थे और हस्ताक्षरों में भी गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। जांच अधिकारी ने धारा 420, 467, 468, 471, 477-ए और 120-बी आईपीसी के तहत अपराध प्रथम दृष्टया प्रमाणित माना है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी, बढ़ी चर्चाएं
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि बिना क्षेत्राधिकार अपील स्वीकार करना, मृत व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई करना और निर्धारित प्रक्रिया से पहले एकपक्षीय सुनवाई करना गंभीर अनियमितता और मिलीभगत को दर्शाता है। मामले के सामने आने के बाद जिलेभर में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।