देेशभर के 72 कैंसर विशेषज्ञ एक मंच पर
उदयपुर, 18 जुलाई: अमेरिकन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), उदयपुर में न्यूक्लियर मेडिसिन एवं प्रोस्टेट कैंसर विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस जीबीएच केयर काॅन हुई। इसमें देशभर से 72 कैंसर विशेषज्ञों ने भाग लिया और प्रोस्टेट कैंसर की आधुनिक जांच, उपचार एवं रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी में हो रही नवीनतम प्रगति पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अमेरिकन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डीन डॉ. विनय जोशी एवं जीबीएच समूह की डायरेक्टर डॉ. सुरभि पोरवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कैंसर उपचार में नई तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ऐसे वैज्ञानिक आयोजनों को चिकित्सकों के लिए ज्ञानवर्धक बताया।
कांफ्रेंस के प्रमुख वक्ताओं में एम्स भुवनेश्वर से डॉ. कन्हैयालाल, निम्स जयपुर से डॉ. टेकचंद, एम्स नई दिल्ली से डॉ. समीम तथा पीजीआई चंडीगढ़ से डॉ. राजेंद्र शामिल रहे। विशेषज्ञों ने न्यूक्लियर मेडिसिन की नई तकनीकों तथा प्रोस्टेट कैंसर के सटीक निदान और उपचार से जुडे़ महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। पीएसएमए पेट सीटी के माध्यम से प्रोस्टेट कैंसर की सटीक जांच, बायोप्सी की भूमिका, रेडिएशन थेरेपी की नवीन तकनीकों तथा रेडियोन्यूक्लाइड थेरेपी द्वारा लक्षित एवं प्रभावी उपचार पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि पीएसएमए आधारित जांच से कैंसर की प्रारंभिक एवं सूक्ष्म अवस्थाओं का भी सटीक पता लगाया जा सकता है, जिससे उपचार की सफलता की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों ने गैलियम जनरेटर के माध्यम से पेट सीटी करने की आधुनिक तकनीक की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से प्रोस्टेट कैंसर की पहचान अधिक सटीकता से संभव होगी और मरीजों को समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
कॉन्फ्रेंस में प्रोस्टेट कैंसर के उपचार के बाद मरीजों की फॉलोअप मॉनिटरिंग में पीएसएमए पेट सीटी की उपयोगिता पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि यह तकनीक उपचार के बाद रोग की पुनरावृत्ति का समय रहते पता लगाने में अत्यंत प्रभावी है।
कांफ्रेंस कांफ्रेंस के दौरान देश में तेजी से बढ़ रहे प्रोस्टेट कैंसर के मामलों, जोखिम कारकों, समय पर जांच की आवश्यकता तथा जागरूकता बढ़ाने की रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस राष्ट्रीय कांफ्रेंस के आयोजन में डॉ. मनन सरूपरिया, डॉ. परनीत सिंह, डॉ. कमलेश सिंह, डॉ. विवेक शर्मा, डॉ. प्रदीप शर्मा एवं डॉ. वरुण लड्डा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।