8 घंटे काम, 30 हजार वेतन और स्थायी नौकरी की मांग उठी

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मजदूर दिवस पर केसरियाजी में सभा और जुलूस
ऋषभदेव, 2 मई:
अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर केसरियाजी में जनवादी मजदूर यूनियन द्वारा सभा और जुलूस का आयोजन किया गया, जिसमें मजदूरों और किसानों की स्थिति सुधारने पर जोर दिया गया। सभा की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुई। यूनियन अध्यक्ष डालचंद ने मजदूर दिवस का इतिहास बताया, वहीं सचिव जयंतीलाल ने असमान मजदूरी और वैश्विक परिस्थितियों के असर पर चिंता जताई।
सभा में 8 घंटे कार्य, 30 हजार न्यूनतम वेतन, ठेका प्रथा समाप्त करने और संविदाकर्मियों को स्थायी करने की मांग उठी। महिला वक्ताओं ने कार्यस्थल पर भेदभाव और कम वेतन का मुद्दा उठाया।
सभा के बाद कस्बे में जुलूस निकाला गया, जिसमें मजदूरों ने विभिन्न मांगों को लेकर नारेबाजी की। जुलूस पगलिया जी से बस स्टैंड तक पहुंचा, जहां नुक्कड़ सभा में मजदूर एकता और संघर्ष को मजबूत करने का आह्वान किया गया।
“समस्त मजदूर और किसानों की हालत सुधरने पर ही समाज के सभी तबकों का भला होगा” ये विचार जनवादी मजदूर यूनियन द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय मेहनतकश दिवस पर केसरियाजी में आयोजित सभा में उभरकर आये।
सभा की शुरुआत बंशीलाल परमार और उसकी सांस्कृतिक टोली ने ‘महंगाई की मार है’ गीत गाकर की। जनवादी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष डालचंद ने मजदूर दिवस का इतिहास बताया।
मई दिवस की सभा में 8 घंटे काम, डबल ओवर टाइम और 30000 मासिक वेतन देने, सभी ठेका और संविदा कर्मियों को स्थाई करने, कुक कम हेल्पर को मजदूर मानकर न्यूनतम मजदूरी देने, सभी जर्जर भवनों के लिए बजट देने, जंगल की जमीन पर खातेदारी पट्टे देने, मजदूरों, और आदिवासियों सहित हक की मांग करने वालों का दमन रोकने आदि मांगे भी रखी गई।
सभा को संबोधित करते हुए जनवादी मजदूर यूनियन के सचिव जयंतीलाल ने बताया कि इंसान की रोटी, कपड़ा, मकान की जरूरते समान है लेकिन सबकी मजदूरी मालिकों की मनमानी के हिसाब से अलग-अलग तय की जाती है। उन्होंने बताया कि युद्ध और तनाव की हालत का विश्व के मेहनतकशों पर कुप्रभाव पड़ रहा है और आने वाला समय चुनौतिपूर्ण है जिसका मुकाबला संगठन और साझा संघर्ष से ही संभव हैं।
सभा में बोलते हुए हिना परमार ने बताया कि समाज ने महिलाओं को बिना वेतन वाली मजदूर मान लिया गया है तथा कार्यस्थल पर महिलाओं को इसी सोच के चलते पुरुष से भी कम मेहनताना दिया जाता है और दुर्व्यवहार किया जाता है।
सभा में कुक कम हेल्पर गंगाबाई ने बताया कि राज्य सरकार ने 8034 रुपए न्यूनतम मजदूरी तय की और सरकार ही कुक कम हेल्पर को 2467 रुपए मासिक मजदूरी देकर न्यूनतम मजदूरी कानून को लागू नहीं कर वेट बेगार करा रही है।
सभा को कुक कम हेल्पर संघर्षं समिति के नाना भगत ने दूध गर्म करने का मेहनताना नहीं देने का मसला उठाया। सभा में जीवराज, कांतिलाल, छात्रावास संघर्ष समिति के वीरेंद्र, मजदूर किसान हक संगठन के गणेश डामोर, कांताबाई, लक्ष्मीबाई ने भी विचार रखें। सभा का संचालन जनवादी मजदूर, यूनियन धुलेव के सचिव ईश्वर लाल ने किया।
सभा के बाद जनवादी मजदूर यूनियन की ओर से मजदूर दिवस पर 1 मई 2026 को केसरियाजी में ढोल धमाकों के साथ कस्बे में जुलूस निकाला ।
सभा के बाद कस्बे में जोरदार जुलुस निकाला जो पगलिया जी से रवाना होकर स्कूल मार्ग, पाटूणा चौक, मंदिर मार्ग, होते हुए बस स्टैंड पर जाकर सभा में बदल गया जहां मजदूर किसान हक संगठन के सचिव शांतिलाल डामोर ने नुक्कड सभा को संबोधित करते हुए बताया कि उत्पादन मजदूर की मेहनत से होता है मालिक, काम के घंटे बढ़ाकर और मजदूर की मेहनत पर डाका डालकर शोषण करता है। मजदूर के शोषण के बल पर उद्योगपति एक कारखाने से कई कारखानों का मालिक बन जाता हैं जबकि मजदूर पीढ़ी दर पीढ़ी मजदूर बना रहता है। जो जितना ज्यादा मेहनत करता है उसको उतनी ही मजदूरी कम दी जाती है और उसका सम्मान भी कम किया जाता है। डामोर ने कहा कि हर प्रकार के मजदूरों को अपनी यूनियनें बनानी है तथा एकजुट संघर्ष तेज करना है।
जुलूस में मजदूर, कमाने वाला खाएगा-लूटने वाला जाएगा, जो अमरीका और इजराइल का यार है—देश का गद्दार है, मजदूर दिवस के शहीद अमर रहे, मजदूरों पर दमन बंद करो, आदिवासियों पर दमन बंद करो, किसानों पर दमन बंद करो, गुड़गांव-मानेसर-नोएडा के मजदूरों व उनके समर्थकों को रिहा करो, जब तक भूखा इंसान रहेगा-धरती पर तूफान रहेगा, जंगल जमीन किसकी है-हमारी है हमारी है, कांग्रेस-भाजपा सगे-भाई बाकी सब मौसेरे भाई, देश की जनता भूखी है-ये आजादी झूठी है, कुक कम हेल्पर को न्यूनतम मजदूरी दो, ठेका प्रथा बंद करो, सभी ठेका और संविदाकर्मियों को स्थाई करो, न्यूनतम वेतन 30000 करो, चारों श्रम संहिताएं रद्द करो आदि नारे लगाते हुए चल रहे थे। जुलूस में आगे आगे महिला एवं पुरुष ढोल की थाप पर हाथों में मजदूरों का लाल झण्डा लहराते हुए नाचते, गाते और नारे लगाते चल रहे थे।