कैचमेंट और जल प्रवाह क्षेत्र में मिट्टी-मलबा डाले जाने का दावा; पर्यावरणप्रेमियों ने जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठाए सवाल
उदयपुर, 21 अगस्त: झीलों की नगरी उदयपुर में ऐतिहासिक जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर प्रशासन के दावों के बीच उदयसागर झील क्षेत्र में कथित रूप से बड़े पैमाने पर मिट्टी और मलबा डालकर भराव किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े लोगों का दावा है कि झील के आसपास ऐसे स्थानों पर भराव किया जा रहा है, जिनका सीधा संबंध झील के जलग्रहण क्षेत्र और प्राकृतिक जलप्रवाह से है। इससे उदयसागर की जलधारण क्षमता और प्राकृतिक जलनिकासी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बीच उठे सवाल
उदयपुर की झीलों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में न्यायालय पहले भी जलस्रोतों, उनके कैचमेंट और प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्रों के संरक्षण पर सख्त रुख अपना चुका है। ऐसे में उदयसागर क्षेत्र में कथित भराव की गतिविधियों ने प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि यदि यह भराव नियम विरुद्ध है तो संबंधित विभागों की नजर में यह गतिविधि समय रहते क्यों नहीं आई।
लाखों टन भराव के दावे की जांच जरूरी
स्थानीय स्तर पर उदयसागर क्षेत्र में बड़ी मात्रा में मिट्टी और मलबा डाले जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि भराव की वास्तविक मात्रा, क्षेत्रफल और इससे प्रभावित भूमि की स्थिति का आधिकारिक आंकलन अभी सामने नहीं आया है। इसलिए पूरे मामले में प्रशासन द्वारा मौके का वैज्ञानिक सर्वे और रिकॉर्ड की जांच कराया जाना जरूरी है। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि भराव किस क्षेत्र में, किस अनुमति के आधार पर और किस उद्देश्य से किया गया।