चारभुजा धाम की पार्किंग पर बढ़ा विवाद

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भामाशाहों की दान भूमि पर व्यावसायिक उपयोग का आरोप, 20 साल के ठेके को निरस्त करने की मांग तेज
राजसमंद, 6 अगस्त:
मेवाड़ के प्रसिद्ध चारभुजानाथ मंदिर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों, पुजारी वर्ग और जनप्रतिनिधियों ने देवस्थान विभाग द्वारा पार्किंग का 20 वर्षों के लिए ठेका दिए जाने का विरोध तेज कर दिया है। उनका आरोप है कि जिस भूमि पर पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है, वह मूल रूप से भामाशाहों द्वारा श्रद्धालुओं की निशुल्क सुविधा के लिए दान की गई थी।
पूर्व सरपंच नाथूलाल गुर्जर ने कहा कि अब उसी भूमि पर चार पहिया वाहनों से 100 रुपये तक पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है, जो दानदाताओं की भावना के विपरीत है। उन्होंने सवाल उठाया कि श्रद्धालुओं के हित में दान की गई भूमि का व्यावसायिक उपयोग किस आधार पर किया जा रहा है।
ग्रामीण प्रतिनिधि लक्ष्मण गुर्जर और बद्रीलाल सेवक ने भी इस व्यवस्था का विरोध करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर दान की गई संपत्ति को राजस्व अर्जन का माध्यम बनाना उचित नहीं है। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि बढ़े हुए पार्किंग शुल्क और धर्मशाला किराए से गरीब श्रद्धालुओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर पार्किंग ठेका निरस्त करने, धर्मशाला संचालन की समीक्षा कराने और दान भूमि के मूल उद्देश्य की जांच कराने की मांग की है।