झील प्रेमियों ने उठाए सवाल, कहा- वैज्ञानिक अध्ययन और पारिस्थितिक स्वास्थ्य के आकलन के बिना पर्यटन गतिविधियों का विस्तार चिंताजनक
उदयपुर, 9 अगस्त: उदयपुर की झीलों के संरक्षण एवं विकास को लेकर तैयार ड्राफ्ट नीति पर झील प्रेमियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। रविवार को आयोजित झील संवाद में विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव झील संरक्षण की मूल भावना के बजाय पर्यटन और गतिविधियों के विस्तार पर अधिक केंद्रित नजर आता है। वक्ताओं ने कहा कि फतहसागर और पिछोला जैसी पेयजल झीलों की प्राथमिकता जल सुरक्षा और पारिस्थितिक संरक्षण होनी चाहिए। उन्होंने नीति को अंतिम रूप देने से पहले वैज्ञानिक अध्ययन, विशेषज्ञों की राय और आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की।
वैज्ञानिक अध्ययन के बिना पर्यटन विस्तार पर सवाल
झील संरक्षण समिति के डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि राजस्थान झील (संरक्षण एवं विकास) प्राधिकरण अधिनियम, 2015 के तहत झीलों का सर्वेक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन, सीमाओं एवं प्रवाह क्षेत्र का निर्धारण और अनधिकृत गतिविधियों पर रोक प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि पहले झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन हुआ या पर्यटन गतिविधियों का खाका तैयार किया गया। रामसर वेटलैंड सिटी उदयपुर में झीलों के स्वास्थ्य का वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी है।
पेयजल झीलों को पर्यटन श्रेणी में रखने पर आपत्ति
मेहता ने फतहसागर और पिछोला जैसी पेयजल झीलों को पर्यटन एवं आमोद-प्रमोद की श्रेणी में रखने पर चिंता जताई। उन्होंने मोटर चालित नौकाओं से जुड़े न्यायिक निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने की भी मांग की।
ड्राफ्ट किसने बनाया, सार्वजनिक हो
पूर्व झील विकास प्राधिकरण सदस्य तेजशंकर पालीवाल ने ड्राफ्ट तैयार करने वाले व्यक्ति, संस्था या विशेषज्ञ समूह की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने जल विज्ञान, वेटलैंड पारिस्थितिकी, जैव विविधता, भू-विज्ञान, जल गुणवत्ता और पर्यावरण विशेषज्ञों से परामर्श की जरूरत बताई।
सरकारी नीतियों में विरोधाभास का आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता नंदकिशोर शर्मा ने कहा कि एक ओर सरकारी वैज्ञानिक सामग्री में बढ़ते पर्यटन और मानवीय दबाव को पक्षियों व झीलों के लिए खतरा बताया गया है, वहीं दूसरी ओर गतिविधियों के विस्तार का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पर्यावरणविद कुशल रावल ने कहा कि झीलें सार्वजनिक प्राकृतिक धरोहर हैं और सरकार उनकी मालिक नहीं, संरक्षक है। वरिष्ठ नागरिक द्रुपद सिंह और विनोद कुमावत ने झीलों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की।