नहरों की सफाई और गेटों के रखरखाव पर किसानों ने उठाए सवाल, वन्यजीवों से फसल नुकसान का मुद्दा भी गूंजा
उदयपुर। जयसमंद झील में कम जलस्तर के चलते रबी फसल 2026-27 के लिए किसानों को इस बार केवल दो बार सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। नहरों में 10 नवंबर से जलापूर्ति शुरू होगी। सिंचाई व्यवस्था तय करने और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए गुरुवार को झील की पाल स्थित सिंचाई विभाग कार्यालय परिसर में जिला कलेक्टर एवं जल वितरण समिति अध्यक्ष मुहम्मद जुनेद पी.पी. की अध्यक्षता में बैठक हुई।
बैठक में किसानों ने नहरों की सफाई में देरी और गेटों के रखरखाव का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि नहरों की नियमित सफाई नहीं होने से पानी खेतों के अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता। इससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होती है। किसानों ने पानी छोड़ने से पहले नहरों की सफाई कराने और गेटों का उचित रखरखाव सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग हो सके।
किसानों ने कृषि विभाग से समय पर बीज और खाद उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। इसके साथ ही नीलगाय, पैंथर और जंगली सूअरों से फसलों को हो रहे नुकसान पर चिंता जताते हुए फसल सुरक्षा के प्रभावी उपाय करने की जरूरत बताई।
जिला कलेक्टर ने किसानों की समस्याएं सुनकर संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता निर्मल मेघवाल, सराड़ा के सहायक अभियंता भावेश पाटीदार, सलूंबर के सहायक अभियंता ईश्वर सुधार, कनिष्ठ अभियंता मनोहर लाल मीणा और कपिल मेहता सहित कृषि एवं वन विभाग के अधिकारी, जल वितरण समिति के सदस्य और किसान मौजूद रहे।