विकास की राह में गंदगी है बड़ी बाधा! स्वच्छता को जन आंदोलन बनाना है आवश्यक : के के गुप्ता

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मुख्यमंत्री के हैं सख्त निर्देश, स्वच्छता में जीरो टॉलरेंस की नीति पर होगा काम : के के गुप्ता
स्वच्छ भारत मिशन प्रदेश ब्रांड एंबेसडर गुप्ता ने जिला अलवर में स्वच्छता कार्यशाला को किया संबोधित
अलवर/जयपुर, 6 अप्रैल:
जिला कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के ब्रांड एंबेसेडर के.के. गुप्ता द्वारा जिले के समस्त नगरीय निकायों की स्वच्छता कार्यशाला को संबोधित किया गया। इस दौरान स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
गुप्ता ने कहा कि सभी निकाय समन्वय और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए शहरों को स्वच्छ, सुंदर एवं हरित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा इस कार्यशाला के सकारात्मक परिणाम शीघ्र ही दिखाई देंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के अंतर्गत स्वच्छता कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पूर्ण जिम्मेदारी और समर्पण भाव से कार्य करने के निर्देश दिए गए।
गुप्ता ने कहा कि स्वच्छता कोई साधारण कार्य नहीं है, जहां स्वच्छता की स्थापना हो गई वहां बड़े बदलाव की आगाज होकर रहता है। सही मायनो में स्वच्छता ना केवल क्षेत्र, जिला और प्रदेश की तस्वीर बदलेगी बल्कि व्यक्ति के जीवन को भी बदल कर रख देगी। इसका जीता जागता उदाहरण प्रदेश के डूंगरपुर जिला मुख्यालय पर देखने को मिल रहा है। आज राजस्थान ही बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पटल पर डूंगरपुर मॉडल के चर्चे है।
श्री गुप्ता ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके सभापति कार्यकाल में डूंगऱपुर ने स्वच्छता को लेकर ऐतिहासिक कार्य किए। जनजाति बहुल जिले की निकाय ने स्वच्छता में ऐसा बड़ा काम और करिश्मा कर दिखाया कि समूचे विश्व में डूंगरपुर की विशिष्ट पहचान कायम हुई। डूंगरपुर मॉडल देश-प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए नजीर बना। यह संभव भी तब हो पाया जब जनसहभागिता सुनिश्चित की गई।
जयपुर के अल्बर्ट म्यूजियम से दिया है प्रदेश को संदेश
गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर के अल्बर्ट म्यूजियम से स्वच्छ भारत अभियान को प्रदेश के प्रत्येक नगर निकाय क्षेत्र में साकार करने का संदेश दिया है। मुख्यमंत्री के संकल्प को पूरा करने प्रदेशवासियों को जागरूक रहना होगा। नगर निकाय के साथ प्रत्येक विभाग का दायित्व है कि मुख्यमंत्री के विजन और संकल्प को साकार करने के लिए अपने हिस्से का दायित्व पूरी ईमानदारी के साथ निभाएं। जिम्मेदार अधिकारी स्वच्छता को बोध कराएं और विकसित भारत निर्माण की कल्पना को साकार करने जी जान से जुट जाएं।
गुप्ता ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री की यह मंशा है कि राज्य के किसी भी जिला गांव ढाणी में बैठा व्यक्ति स्वच्छता से वंचित नहीं रहे क्योंकि जहां स्वच्छता और साफ सफाई होगी तो वातावरण में शुद्धता रहेगी। वही, जहां शुद्धता का वास होता है वहां के लोगों का स्वास्थ्य भी हमेशा अच्छा रहता है तथा एक स्वस्थ बौद्धिक मानव संसाधन देश और प्रदेश को प्रगति के राह पर ले जाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रदेश और केंद्र की सरकार द्वारा लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आयुष्मान आरोग्य योजना जैसी योजनाएं चलाई जाती हैं जिसमें आज भी अनुमानित 3500 करोड़ रुपए व्यय होता है वहीं यदि लोगों का स्वास्थ्य उत्तम रहेगा तो इन योजनाओं पर होने वाला खर्च बचेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में यह धनराशि उपयोग में आएगी।
स्वच्छता को प्रभावित करते हैं यह 5 मुख्य घटक
घर-घर कचरा संग्रहणः
सुबह 10 बजे से पूर्व शत-प्रतिशत घर-घर कचरा संग्रहण हो। स्रोत पर ही गीला और सूखा कचरा अलग किया जाए। जनजागरूकता के लिए विशेष अभियान चलाएं। कचरा संग्रहण की सूक्ष्म मॉनिटरिंग हो ताकि कोई लूपहोल नहीं रहे।
नाइट स्वीपिंग : रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक प्रत्येक 400 मीटर क्षेत्र में एक कर्मचारी सफाई करे। वाणिज्यिक क्षेत्रों में 365 दिन रात्रिकालीन सफाई होनी चाहिए। रात की पारी में सफाई करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
सार्वजनिक शौचालय : सार्वजनिक शौचालय दिन में तीन बार साफ हों। अधिकारी और स्वास्थ्य निरीक्षण स्वयं दिन में एक बार सार्वजनिक शौचालय का उपयोग करें। इससे शौचालयों में स्वच्छता बढ़ेगी जिससे आमजन की सराहना भी मिलेगी। विद्यालयों के शौचालयों की भी नियमित सफाई करवाएं।
प्लास्टिक थैली : प्लास्टिक थैली हमारे पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और पशुओं के लिए हानिकारक है। प्लास्टिक थैली के उपयोग को इस हद तक हतोत्साहित करना होगा कि प्लास्टिक हमें नजर ही नहीं आए। प्लास्टिक थैली का उत्पादन और व्यापार करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए।
खाली प्लॉट्स : शहर में खाली प्लाट्स कचरे का बड़ा केंद्र बन गए हैं। ऐसे सभी खाली प्लाट्स के मालिकों को गंदगी साफ करवाने के बाद बाउण्ड्री करवाने के लिए पाबंद करें। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो निगम यह काम करवाए और लागत का 10 गुना प्लॉट मालिक से वसूले। राशि जमा नहीं करवाने पर प्लॉट को सीज किया जाए।
इन बिन्दुओं पर भी दें ध्यान
शहर में शत प्रतिशत स्ट्रीट लाइट जलनी चाहिए। बाग-बगीचों की नियमित सफाई हो। वहां झूले लगे हों तथा फव्वारे कार्यशील हों। निर्माण सामग्री सड़को और नालियों को बाधित नहीं करे। बिना लाइसेंस के मांस की दुकानों को बंद करवाया जाए। डिवाइडर कचरा पात्र नहीं बनें।उनके दोनों और मिट्टी नहीं हो। सरकारी सम्पत्तियों पर पोस्टर नहीं चिपके हों। नई कॉलोनियों में सड़क-नाली आदि सुविधाओं के विकास के बाद ही भूरूपांतरण हो।
90 ए के अंतर्गत भू उपयोग परिवर्तन करने से पहले की जिम्मेदारी के बारे में स्पष्ट निर्देश दिए
90 ए को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए कि 90 ए करने के पहले जब तक वह मालिक द्वारा सभी सुविधा उपलब्ध नहीं कर दी जाती है तब तक 90 ए की कार्रवाई संपादित नहीं की जाए तथा निर्माण की स्वीकृति जारी करने से पूर्व जब तक भूमि का पूरा डेवलपमेंट संबंधित भू मालिक द्वारा नहीं कर दिया जाए स्वीकृती जारी नहीं की जाए। जिसमें रोड लाइट, पानी, नाली तथा बगीचे जैसे आवश्यक कार्यों को पूर्ण करने पश्चात ही उसे जो 12.5 परसेंट प्लॉट रोके गए हैं उसको आवंटन किया जाए। उससे पहले किसी भी सूरत में अगर आपने आवंटन कर दिया तो उसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार रहेगा। जनता यह नहीं समझती कि कॉलोनी में डेवलपमेंट संबंधित मालिक द्वारा किया जाएगा। वह तो केवल निकायों को कोसती है तथा निकाय से उम्मीद करती है कि सभी तरह की सुविधा उन्हें उपलब्ध कराई जाए जबकि यह स्पष्ट है कि जो भी व्यक्ति कॉलोनी कटेगा वही सारी व्यवस्थाओं सुविधाओं का संचालन करेगा।
बैठक में नगर निगम आयुक्त सोहन सिंह नरूका, प्रशिक्षु आईएएस एश्वर्यम प्रजापति सहित जिले की नगरीय निकायों के अधिशासी अधिकारी मौजूद रहे।
ब्रांड एंबेसडर गुप्ता ने जिला कलेक्टरसे की मुलाकात
स्वच्छता प्रदेश ब्रांड एंबेसडर गुप्ता को जिला कलेक्टर डॉ शुक्ला ने कहा कि अलवर को राजस्थान के सबसे स्वच्छ शहर में से एक बनाने की दिशा में सार्थक प्रयास किए जाएंगे।