उदयपुर, 26 सितम्बर: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग और साहित्य अकादेमी की ओर से विजयदान देथा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. अर्जुनदेव चारण ने कहा कि राजस्थानी लोक कथाएं समाज के भविष्य का निर्माण करती हैं। उन्होंने विजयदान देथा की साहित्य साधना और मातृभाषा को वैश्विक पहचान दिलाने में योगदान पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा ने देथा के संघर्षपूर्ण जीवन और साहित्य साधना को रेखांकित किया। साहित्य अकादेमी सचिव डॉ. वरुण गुलाटी ने कहा कि देथा का कथा साहित्य सांस्कृतिक चेतना का पर्याय है। विशिष्ट अतिथि प्रो. नीरज शर्मा ने उनकी रचनाओं में मानवीय भावों की अभिव्यक्ति को विशेष बताया। तकनीकी सत्रों में सामाजिक रूढ़ियों, नारी चेतना, लोक चेतना और कथा दृष्टि पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।