कन्हैयालाल हत्याकांड पर गहलोत का भाजपा पर हमला, बोले- चार साल बाद भी न्याय अधूरा

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उदयपुर, 27 जून: उदयपुर के बहुचर्चित कन्हैयालाल टेलर हत्याकांड के चार वर्ष पूरे होने पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की मंशा कन्हैयालाल को न्याय दिलाने की कभी नहीं रही और मामला जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है।
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में गहलोत ने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार होने के बावजूद मामले में न्याय की प्रक्रिया बेहद धीमी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है, क्योंकि इस मामले के आरोपी भाजपा से जुड़े कार्यकर्ता थे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकरण की जांच नैशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) कर रही है और सुनवाई एनआईए की विशेष अदालत में चल रही है। उन्होंने दावा किया कि 180 गवाहों में से अब तक केवल 21 के ही बयान दर्ज हो पाए हैं, जबकि घटना को चार वर्ष बीत चुके हैं।
गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव के दौरान “5 लाख बनाम 50 लाख” का झूठा प्रचार कर राजनीतिक लाभ उठाया, लेकिन सत्ता में आने के बाद कन्हैयालाल को न्याय दिलाने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah राजस्थान आते हैं, लेकिन अब कन्हैयालाल का नाम तक नहीं लेते और दोषियों को सजा दिलाने पर भी कोई चर्चा नहीं करते।
उन्होंने प्रदेशवासियों से भाजपा के “असल चरित्र” को पहचानने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी ने केवल लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है।
180 में से सिर्फ 21 गवाहों की गवाही
28 जून 2022 को उदयपुर में कन्हैयालाल टेलर की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में एनआईए की विशेष अदालत में पिछले 27 महीनों से ट्रायल जारी है। अभियोजन पक्ष के 180 गवाहों में से अब तक केवल 21 की ही गवाही पूरी हो सकी है, जबकि चश्मदीद गवाह ईश्वर गौड़ और राजकुमार सहित 159 गवाहों के बयान अभी शेष हैं।
मामले में डीएनए विशेषज्ञ डॉ. राजेश की गवाही 18 जून को प्रस्तावित थी, जो नहीं हो सकी। अब उनकी गवाही 2 जुलाई को दर्ज की जाएगी।
एनआईए ने प्रारंभिक चालान में 166 गवाह शामिल किए थे। जनवरी 2026 में 14 और गवाहों को सूची में जोड़ा गया। मामले के नौ आरोपियों में से दो को जमानत मिल चुकी है, जबकि शेष सात आरोपी अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद हैं। दिसंबर 2022 में एनआईए ने गौस मोहम्मद, मोहम्मद रियाज सहित सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया था।