अंतरराष्ट्रीय नशा विरोधी दिवस पर विशेष: आरोग्य सेवा संस्थान के माध्यम से चला रहे जनजागरण और पुनर्वास अभियान
उदयपुर, 25 जून: कभी स्वयं नशे की गिरफ्त में रहे नरपत सिंह चौहान आज हजारों युवाओं और परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन चुके हैं। भारत सरकार के ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ से जुड़कर वे अपने आरोग्य सेवा संस्थान के माध्यम से नशे के खिलाफ जनजागरण और पुनर्वास का अभियान चला रहे हैं। उनकी पहल से अब तक 1500 से अधिक लोग नशे की लत से मुक्त होकर सामान्य जीवन की ओर लौट चुके हैं।
संघर्ष से सेवा तक का सफर
नरपत सिंह बताते हैं कि तनाव दूर करने के लिए शुरू हुई शराब की आदत धीरे-धीरे गंभीर लत में बदल गई थी। पिता के साये के बिना कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े नरपत सिंह का जीवन नशे के कारण बिखरने लगा था। सामाजिक उपेक्षा, शारीरिक कमजोरी और मानसिक पीड़ा के बीच एक दिन नशा मुक्ति केंद्र में उनकी छोटी भतीजी के मासूम सवाल ने उनकी जिंदगी बदल दी। उसी क्षण उन्होंने नशा छोड़ने का संकल्प लिया और नई शुरुआत की।
युवाओं को दे रहे नई दिशा
आज आरोग्य सेवा संस्थान के माध्यम से वे नशा पीड़ितों की काउंसलिंग, उपचार और पुनर्वास का कार्य कर रहे हैं। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक मंचों पर युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उनका संदेश है— “हाई से नहीं, हसल से”। उनका मानना है कि नशा अपराध नहीं, बल्कि एक बीमारी है, जिसका उपचार और सहारा मिलना चाहिए।
नरपत सिंह की संघर्षगाथा यह साबित करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच के बल पर व्यक्ति न केवल स्वयं अंधकार से बाहर निकल सकता है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बन सकता है।