उदयपुर की झीलों पर हाईकोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर मांगी रिपोर्ट

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शायर ‘हबीब’ की नज़्म का उल्लेख कर कहा— झीलें ही शहर की असली पहचान, 13 जुलाई को अगली सुनवाई
उदयपुर, 8 जून:
राजस्थान हाईकोर्ट की अवकाशकालीन खंडपीठ ने उदयपुर की झीलों, तालाबों और जल निकायों के संरक्षण को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। कोर्ट ने जिला कलक्टर को विभिन्न विभागों के समन्वय से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही झीलों और उनके कैचमेंट क्षेत्रों में किसी भी नए निर्माण, अतिक्रमण या भौतिक स्वरूप में बदलाव पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रेखा बोराणा की खंडपीठ ने अपने आदेश में प्रसिद्ध शायर जयकृष्ण चौधरी ‘हबीब’ की नज़्म ‘उदयपुर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि शहर की खूबसूरती और पहचान उसकी झीलों से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि उदयपुर की झीलें केवल पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि भूजल पुनर्भरण, जैव विविधता संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरणीय संतुलन की आधारशिला हैं।
खंडपीठ ने रूपसागर तालाब, मदार नहर, फतहसागर झील के किनारे प्रस्तावित नाइट फूड हब समेत विभिन्न मुद्दों को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, यूडीए और जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने पिछोला, फतहसागर, स्वरूपसागर, रंगसागर, गोवर्धन सागर, बड़ी, उदयसागर सहित सभी प्रमुख जलाशयों की वर्तमान स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी।

हाईकोर्ट ने क्या-क्या मांगा?
सभी प्रमुख झीलों, तालाबों और नहरों का निरीक्षण।
जल गुणवत्ता और प्रदूषण स्तर की रिपोर्ट।
अतिक्रमण और कैचमेंट क्षेत्र की स्थिति का विवरण।
संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी।
झीलों के आसपास प्रस्तावित विकास परियोजनाओं का पूरा ब्यौरा।
जिला कलक्टर को सभी विभागों की समेकित रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी।