70 साल बाद लौटेगी शाही परंपरा, पूर्व राजपरिवार पहनाएगा भगवान को विशेष पोशाक; शहर में तीन भव्य रथयात्राएं निकलेंगी
उदयपुर, 15 जुलाई : आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के पावन अवसर पर गुरुवार को झीलों की नगरी भगवान जगन्नाथ की भक्ति में सराबोर रहेगी। देश की तीसरी सबसे बड़ी और राजस्थान की सबसे बड़ी मानी जाने वाली जगन्नाथ रथयात्रा इस बार कई ऐतिहासिक परंपराओं की साक्षी बनेगी। पहली बार 375 वर्ष पुराने ऐतिहासिक लकड़ी के रथ को नगर भ्रमण में शामिल किया जाएगा, वहीं करीब 70 वर्ष बाद मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की ओर से भगवान जगन्नाथ को शाही पोशाक अर्पित करने की परंपरा भी पुनः शुरू होगी।
ऐतिहासिक जगदीश मंदिर से दोपहर 3 बजे रजत रथ और 375 वर्ष पुराने लकड़ी के रथ की विधिवत पूजा के बाद रथयात्रा प्रारंभ होगी। लकड़ी के रथ में भगवान जुगल जोड़ी सरकार विराजमान होंगे, जबकि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रजत रथ में नगर भ्रमण करेंगे। यात्रा जगदीश चौक से घंटाघर, बड़ा बाजार, भड़भूजा घाटी, भोपालवाड़ी, तीज का चौक, मंडी की नाल, अस्थल मंदिर, झीणीरेत, आरएमवी चौक, कालाजी-गौराजी, रंगनिवास और भट्यानी चौहट्टा होते हुए पुनः मंदिर पहुंचेगी।
मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की रहेगी सहभागिता
रथयात्रा का एक प्रमुख आकर्षण मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की सहभागिता रहेगी। सिटी पैलेस से पारंपरिक शाही लवाजमे के साथ भगवान की विशेष पोशाक जगदीश मंदिर पहुंचाई जाएगी। पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ‘छेरा पहरा’ (रथ के आगे बुहारने की परंपरा) निभाने के साथ महाआरती भी करेंगे। यह परंपरा लगभग सात दशक बाद दोबारा शुरू हो रही है।
शहर में गुरुवार को तीन प्रमुख रथयात्राएं निकाली जाएंगी। सेक्टर-7 स्थित जगन्नाथ धाम से वर्ष 2007 से निकल रही रथयात्रा में इस बार भी पुरी की तर्ज पर पांच रंगों की विशेष ध्वजा आकर्षण का केंद्र रहेगी। यहां भक्त भगवान को झूला झुलाकर रथ तक लाने की अनूठी परंपरा निभाएंगे।
वहीं आयड़ स्थित गंगू कुंड के इस्कॉन मंदिर से भी भव्य संकीर्तन रथयात्रा निकलेगी। यात्रा मार्ग को आकर्षक बनाने के लिए पुणे से आए श्रद्धालु पूरे रास्ते में भव्य रंगोलियां बनाएंगे। फूलों और मोतियों से सजे रथ, ढोल-नगाड़ों की गूंज, हरिनाम संकीर्तन, विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी और पहली बार शामिल हो रही धार्मिक डिजिटल झांकियां इस यात्रा को विशेष आकर्षण देंगी।
रथयात्रा मार्ग पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों की ओर से पुष्पवर्षा, प्रसाद वितरण और जलपान की व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के व्यापक इंतजाम किए हैं। श्रद्धालुओं में इस ऐतिहासिक रथयात्रा को लेकर विशेष उत्साह बना हुआ है।