पत्नी, भाई और साथियों पर केस; कोर्ट के आदेश पर पुलिस जांच शुरू
चित्तौड़गढ़, 2 मई: जिले में जालसाजी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने भाई और साथियों के साथ मिलकर पति के जाली हस्ताक्षरों के जरिए एनजीओ के नाम पर करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा कर डाला। पीड़ित अनूप आमेरिया को करीब चार साल तक इस पूरे खेल की भनक तक नहीं लगी। मामले का खुलासा होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित अनूप आमेरिया, जो पेट्रोल पंप व्यवसायी हैं, ने बताया कि उनकी पत्नी मधु चिमनानी से तलाक का मामला चल रहा है। साथ रहने के दौरान पत्नी ने घर से जरूरी दस्तावेज चुरा लिए थे और उसी दौरान इस फर्जीवाड़े की योजना बनाई गई। आरोप है कि मधु ने अपने भाई पुनित चिमनानी और अन्य साथियों के साथ मिलकर ‘कोड ऑर्गेनाइजेशन’ नाम से फर्जी एनजीओ संचालित किया।
फर्जी दस्तावेजों से बैंक और सरकारी अनुदान हड़पे
अनूप के अनुसार आरोपियों ने उन्हें संस्था का सचिव दिखाते हुए उनके जाली हस्ताक्षर कर कई बैंक खातों में लेन-देन किया। आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक और बड़ौदा राजस्थान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में खाते खोलकर करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए तक का ट्रांजेक्शन किया गया। आरोप है कि इन पैसों का निजी उपयोग किया गया। इसके अलावा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी और निजी संस्थाओं से वर्क ऑर्डर और अनुदान भी हासिल किए गए। इनमें जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग उदयपुर और एमएसएमई टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर मेरठ जैसे संस्थान शामिल हैं।
मोबाइल डेटा चोरी का भी आरोप
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने उनके मोबाइल से डेटा चोरी कर उसका उपयोग इस फर्जीवाड़े में किया। मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट सहित कुल पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाए गए हैं। डीएसपी शिव प्रकाश टेलर ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और साक्ष्य जुटाकर आरोपियों से पूछताछ की जाएगी।