जनमानस से किया आह्वान : जन आंदोलन के माध्यम एकजुट होकर सरकार के समक्ष रखे मांग
उदयपुर/जयपुर/डूंगरपुर, 26 अप्रैल: स्वच्छ भारत मिशन राजस्थान प्रदेश स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर के.के. गुप्ता ने देश में गौ संरक्षण और भारतीय संस्कृति के सम्मान को लेकर वक्तव्य देते हुए कहा है कि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में प्रत्येक सनातनी भाई-बहन एक जन आंदोलन के माध्यम से एकजुट होकर प्रदेश और देश मैं लंबे समय से चल रही जन आवाज को सरकार तक पहुंचाएं।
गुप्ता ने कहा कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और सनातन परंपरा में गौ माता को सदैव पूजनीय माना गया है तथा करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र रही है। गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय जीवनशैली, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि सदियों से गाय को मातृत्व, सेवा, पोषण और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
उन्होंने कहा कि यदि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाता है तो इससे देशभर में गौ संरक्षण को नई दिशा मिलेगी। साथ ही निराश्रित गोवंश की समस्या के समाधान, गौशालाओं के विकास और पशुधन संवर्धन को बल मिलेगा। उन्होंने समाज से भी आह्वान किया कि केवल सम्मान की बात करने से नहीं, बल्कि गौ सेवा, गौशालाओं के सहयोग और संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।
गुप्ता ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में गौ माता को अत्यंत पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गौ माता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास बताया गया है। अर्थात अनेक दिव्य शक्तियों और देव स्वरूपों का निवास गौ माता में माना गया है। शास्त्रों में गौ सेवा, गौ रक्षा और गौ पूजन को पुण्यदायी बताया गया है। मान्यता है कि गौ माता की सेवा करने से सुख, समृद्धि, शांति और धार्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है।
गुप्ता ने स्वच्छता और गौ संरक्षण को एक-दूसरे से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि शहरों और गांवों में सड़कों पर घूमने वाले गोवंश के लिए सुरक्षित व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने पूर्व में भी यह चिंता जताई थी कि पशुओं को कचरा और प्लास्टिक खाने से गंभीर नुकसान होता है, इसलिए स्थानीय निकायों को बेहतर प्रबंधन करना चाहिए।
गुप्ता ने माता बहनों से भावुक अपील की है कि प्लास्टिक की थैलियां को बाहर खुले में नहीं फेंके, गौ माता इस प्लास्टिक को खाती है और उसकी मृत्यु हो जाती है तथा हम भी इस पाप के भागी बनते हैं। घरों से निकलने वाली प्लास्टिक की थैलियों, पॉलिथीन एवं कचरे को खुले में नहीं फेंकें, क्योंकि सड़क किनारे घूमने वाली गौ माता इन्हें भोजन समझकर खा लेती है। यह प्लास्टिक उनके पेट में जमा होकर गंभीर बीमारी का कारण बनती है और कई बार उनकी दर्दनाक मृत्यु तक हो जाती है। यदि हमारी लापरवाही से वही गौ माता प्लास्टिक खाकर तड़प-तड़प कर मर जाए तो यह अत्यंत दुखद और चिंताजनक है।
गुप्ता ने मातृशक्ति से अपील करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक घर की महिलाएँ संकल्प लें कि प्लास्टिक खुले में नहीं फेंकेंगी, गीले-सूखे कचरे को अलग रखेंगी तथा भोजन को थैली में भरकर सड़क पर नहीं डालेंगी, तो हजारों गौ माताओं का जीवन बचाया जा सकता है। घर की व्यवस्था और स्वच्छता में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए यह अभियान उनके सहयोग से ही सफल हो सकता है।
गुप्ता ने यह भी सचेत किया है कि जो कोई गौ माता यदि प्लास्टिक खाती है और ऐसी गौ माता के दूध का सेवन मनुष्य द्वारा किया जाए तो हमें कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी होने का खतरा भी बना रहता है। वैज्ञानिक अनुसंधान से यह पुष्टि हुई है कि प्लास्टिक न केवल गौ माता के लिए मौत का कारण है बल्कि परोक्ष रूप से यह मानव जीवन के लिए भी बहुत बड़ा जानलेवा खतरा है।