हरियाली अमावस्या मेले में उमड़ा चहुंदिस उल्लास

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रील्स, झूलों और पूंपाड़ियों की धमाल, मालपुओं का कमाल
उदयपुर, 12 अगस्त:
झीलों की नगरी में हरियाली अमावस्या के अवसर पर बुधवार का दिन उमंग और उल्लास की बयार में बहता नजर आया। सहेलियों की बाड़ी से लेकर फतहसागर की लहरों तक शहर लोकसंस्कृति, पारम्परिक व्यंजनों और मेलार्थियों की रौनक से सराबोर रहा।
मेले की शुरुआत होते ही सहेलियों की बाड़ी, देवाली, यूआईटी सर्कल और फतहसागर किनारे पर हजारों की संख्या में मेलार्थी उमड़ पड़े। 650 से अधिक दुकानों, चकरी-डोलर के झूलों, बबल-गन, खिलौनों और हस्तशिल्प की रंग-बिरंगी दुकानों ने मेले को जीवंतता प्रदान की। हर कोने पर युवाओं की रील्स, महिलाओं की चूड़ी-मेहंदी की खरीदारी और बच्चों की खिलखिलाहट ने माहौल को उत्सवमयी बना दिया।
खास आकर्षण रहे गरमा-गरम मालपुए, रबड़ी, आलू की पकौड़ी और जलेबी—जिनकी दुकानों पर लम्बी कतारें दिनभर लगी रहीं। महिलाओं और बच्चों की टोलियां पूरे मेले में घूमती नजर आईं, तो वहीं बड़े भी नाव वाले झूलों में बच्चों संग झूमते दिखे।
प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए 15 से अधिक मार्गों पर नो एंट्री लागू की, जिससे यातायात सुचारु रहा। हालांकि, करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल चलने के बावजूद राहगीरों का उत्साह कम नहीं हुआ, क्योंकि रास्ते भर स्वाद, रंग और खेल के मेल ने उनकी थकान को सैर में बदल दिया। हरियाली अमावस्या मेला एक बार फिर यह सिद्ध कर गया कि उदयपुर केवल झीलों का शहर नहीं, लोकसंस्कृति की जीवंत आत्मा है।