तालाबों के पुनर्जीवन, भू-जल संवर्धन और वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर जारी हुए दिशा-निर्देश
जयपुर/उदयपुर, 23 जून: राजस्थान में जल संकट और लगातार गिरते भू-जल स्तर के बीच जल संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल को सरकारी स्तर पर समर्थन मिला है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के ब्रांड एम्बेसडर एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के समन्वयक के.के. गुप्ता द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए सुझावात्मक पत्र पर राजस्थान नदी बेसिन एवं जल संसाधन योजना प्राधिकरण ने संज्ञान लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह पहल पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
तालाबों के कायाकल्प और जल स्रोतों की सुरक्षा पर जोर
गुप्ता के सुझावों में ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों की सफाई, जल आवक मार्गों को अतिक्रमण मुक्त करना, पालों को मजबूत बनाना तथा जल प्रदूषण रोकने के उपाय शामिल हैं। वहीं शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन प्रणाली को प्रभावी बनाने और छतों के पानी को सीधे भू-जल रिचार्ज से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है।
डूंगरपुर मॉडल बना मिसाल
गुप्ता ने बताया कि नगर परिषद डूंगरपुर में उनके कार्यकाल के दौरान बावड़ियों, कुओं और तालाबों के पुनर्जीवन से प्रतिदिन 8 लाख लीटर अतिरिक्त पानी उपलब्ध होने लगा। शहर के 100 सरकारी भवनों और 500 घरों को वाटर हार्वेस्टिंग से जोड़ने के बाद भू-जल स्तर में लगभग 20 फीट की वृद्धि दर्ज की गई। इसी मॉडल की सराहना तत्कालीन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में भी की थी।
‘वंदे गंगा’ अभियान से मिली नई गति
गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चल रहे ‘वंदे गंगा’ जल संरक्षण अभियान के तहत डूंगरपुर जिले में 100 तालाबों के जीर्णोद्धार, डिसिल्टिंग, जल आवक मार्ग सुधार और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य किए गए हैं। उनका मानना है कि यदि जल संरक्षण के ऐसे प्रयास प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर लागू किए जाएं तो राजस्थान की जल सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।