पंजाब के राज्यपाल बोले, “जनता में खड़े रहने का साहस जरूरी”
उदयपुर, 6 अप्रैल: उदयपुर भाजपा में गुटबाजी को लेकर सामने आए 10 साल पुराने वीडियो विवाद पर राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पूर्व विधायक धर्म नारायण जोशी पर निशाना साधते हुए कहा कि “जो लोग एक चुनाव लड़कर मैदान छोड़ देते हैं, उन्हें जनता में खड़े रहने का दम दिखाना चाहिए।”
कटारिया ने कहा कि जब कोई व्यक्ति जनता की सेवा करता है तो उसे हर परिस्थिति में लोगों के बीच खड़े रहने का साहस होना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “इनके दर्द कहीं और हैं और बता कहीं और रहे हैं। इस रोग का इलाज समय ही करता है, जो अच्छे-अच्छों का इलाज कर देता है।”
“मेरा मूल्यांकन जनता करेगी”
कटारिया ने अपने कामकाज को लेकर कहा कि उनका मूल्यांकन जनता करेगी। उन्होंने बताया कि वे चंडीगढ़ में रहते हुए भी लगातार जनसंपर्क में सक्रिय हैं और अपने कामों का पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि “मैंने जनवरी, फरवरी और मार्च के दौरे का पूरा विवरण तैयार किया है। कोई भी 20 लोगों से पूछ ले, मैं लगातार जनता के बीच रहता हूं।”
“50 साल की सेवा का हिसाब है मेरे पास”
कटारिया ने कहा कि वे पिछले 40-50 वर्षों से जनता के बीच सक्रिय हैं और इस दौरान उन्होंने जो काम किए हैं, वही उनकी पहचान हैं।
उन्होंने कहा, “मैं न बड़े घर से हूं और न ही मेरे पास कोई बड़ी संपत्ति है। एक सामान्य व्यक्ति हूं, लेकिन आज तक कोई मेरे ऊपर दाग नहीं लगा सका।”
सोशल मीडिया टिप्पणी पर बोले- ‘कुछ सीरियस नहीं’
पूर्व विधायक और उनके समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी और राष्ट्रपति को लिखे पत्र पर कटारिया ने कहा कि उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि “मैं किसी की आलोचना नहीं करता, लेकिन यदि किसी को तकलीफ है तो खुलकर बताए, उसका समाधान किया जा सकता है।”
“हार-जीत राजनीति का हिस्सा”
कटारिया ने अंत में कहा कि राजनीति में हार-जीत सामान्य है, लेकिन मैदान छोड़ना उचित नहीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वे खुद भी कभी चुनाव हारे हैं, लेकिन संघर्ष जारी रखा। उन्होंने भरोसा जताया कि पद समाप्त होने के बाद भी उनका जनता से जुड़ाव और सेवा जारी रहेगी।
क्या है पूरा विवाद
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पूर्व विधायक धर्म नारायण जोशी कथित तौर पर कटारिया के खिलाफ बयान देते नजर आए। इसके बाद उनके करीबी नेता ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कटारिया के उदयपुर दौरों और सरकारी संसाधनों के उपयोग पर सवाल उठाए।