कहानी संस्कारों की पाठशाला है : डॉ. विमला भंडारी
उदयपुर, 19 जुलाई: सलिला संस्था, सलूम्बर के तत्वावधान में शनिवार को विज्ञान समिति सभागार, उदयपुर में आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह में पाँच रचनाकारों की दस पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। संचालन प्रकाश तातेड़ ने किया।
समारोह का केंद्रीय विषय “कहानी से संस्कार, संस्कार से जीवन” रहा। इस अवसर पर बीज वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ बाल साहित्यकार डॉ. विमला भंडारी ने कहा कि कहानी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की सशक्त पाठशाला है। कहानी बालमन को संवेदनशील बनाती है तथा जीवन मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
समारोह में डॉ. विमला भंडारी की ‘हँसने वाला झूला’, प्रकाश तातेड़ की ‘रेनबो टापू पर पिकनिक’, सपना जैन ‘संजू’ की ‘सचमुच का परी देश’, उषा सोमानी की ‘पहिया ग्रह’ एवं ‘जीतने की शर्त’ सहित डॉ. संजीव कुमार की पाँच पुस्तकों प्रिय पालतू जानवर, पक्षियों का संसार, भारत के राष्ट्रपति, सुबह के उजाले से, फूलों की दुनिया का लोकार्पण किया गया। विद्वानों ने पुस्तकों की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं का परिचय दिया।
मुख्य अतिथि डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि बाल साहित्य बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने डॉ. विमला भंडारी के बाल साहित्य को संवेदनशील एवं बालमन के निकट बताते हुए कहा कि कविता और कहानी समाज को सकारात्मक दिशा देने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को अच्छी पुस्तकों से जोड़ने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. मंजू चतुर्वेदी ने कहा कि साहित्य की सार्थकता उसके उद्देश्यपूर्ण सृजन में है तथा साहित्यिक संस्थाओं की सक्रियता साहित्य के विकास के लिए आवश्यक है। अध्यक्ष कुमुद वर्मा ने ‘हँसने वाला झूला’ की चर्चा करते हुए कहा कि चित्रों से सुसज्जित यह पुस्तक बालकों की जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति और नैतिक बोध को समृद्ध करती है।
दिनेश पंचाल, डॉ. गोपाल ‘राजगोपाल’, श्याम मठपाल तथा श्रीमती मधु माहेश्वरी ने विभिन्न पुस्तकों का परिचय देते हुए उनकी रचनात्मक विशेषताओं पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर इंडिया नेट बुक्स, दिल्ली की प्रकाशक मनोरमा का सम्मान किया गया। अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी किरण बाला जीनगर तथा युगधारा परिवार ने डॉ. विमला भंडारी, प्रकाश तातेड़ एवं सपना जैन संजू का उपरना ओढ़ाकर सम्मान किया। इस कार्यक्रम में नगर के अनेक वरिष्ठ साहित्यकार उपस्थित रहे उनमें लोकेश चौबीसा, कुसुम भारद्वाज, प्रो विमल शर्मा, पुरुषोत्तम शाकद्वीपी, अशोक मंथन, संजय गुप्ता देवेश, मनोहर डेंबला, पुष्पा कलाल, घनश्याम आर्य, मनमोहन मधुकर, पुष्कर गुप्तेश्वर के नाम उल्लेखनीय है। अंत में चंद्रप्रकाश मंत्री ने सभी अतिथियों, रचनाकारों एवं साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।