झीलों से घिरे उदयपुर में पेयजल की मांग 142 एमएलडी, आपूर्ति सिर्फ 116 एमएलडी

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रिसाव, पुराना नेटवर्क और बढ़ता दबाव बना बड़ी चुनौती, हर दिन 26 एमएलडी पानी की कमी

उदयपुर, 5 जुलाई: जिस शहर की पहचान देश-दुनिया में “झीलों के शहर” के रूप में होती है, वहीं अब पेयजल संकट एक गंभीर शहरी चुनौती बनता जा रहा है। शहर की बढ़ती आबादी और फैलते शहरी दायरे के बीच जलापूर्ति व्यवस्था अपनी क्षमता की सीमा पर पहुंच गई है। हालात यह हैं कि प्रतिदिन 142 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी की जरूरत के मुकाबले जलदाय विभाग सिर्फ 116 एमएलडी पानी ही उपलब्ध करा पा रहा है। यानी रोजाना 26 एमएलडी पानी की कमी शहर के सामने खड़ी है।
यह आंकड़ा केवल पानी की कमी नहीं, बल्कि भविष्य के जल संकट की स्पष्ट चेतावनी भी है। कई कॉलोनियों में लोगों को तय समय पर पानी नहीं मिल रहा, जबकि अनेक क्षेत्रों में कम दबाव और अनियमित जलापूर्ति आम समस्या बन चुकी है। जैसे-जैसे शहर का विस्तार हो रहा है, मौजूदा जलापूर्ति नेटवर्क पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या केवल जल स्रोतों की नहीं, बल्कि दशकों पुराने वितरण तंत्र की भी है। पाइपलाइन लीकेज से बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ हो जाता है, जिससे उपलब्ध पानी भी उपभोक्ताओं तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता। यदि नए जल स्रोत विकसित करने, वितरण नेटवर्क को आधुनिक बनाने और रिसाव रोकने की दिशा में तेजी से काम नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में संकट और विकराल हो सकता है।
जलदाय विभाग का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों से अधिकतम जलापूर्ति की जा रही है तथा पाइपलाइन सुधार, रिसाव नियंत्रण और वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयास जारी हैं। हालांकि विभाग भी मानता है कि बढ़ती मांग के कारण मौजूदा सिस्टम पर लगातार अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।