मानगढ़ धाम को तत्काल राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए : पंचोली

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कल्याण आश्रम की बैठक से लौटे प्रदेश महामंत्री ने कहा- 1913 का नरसंहार जलियांवाला बाग से छह वर्ष पहले हुआ, आदिवासी बलिदान को मिले इतिहास में उचित स्थान
बांसवाड़ा, 6 अक्टूबर:
अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की बैठक से लौटे प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र पंचोली ने कहा कि वागड़ के जलियांवाला बाग कहे जाने वाले मानगढ़ धाम को बिना किसी और विलंब के राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि बैठक में प्रस्ताव क्रमांक 8 के माध्यम से भारत सरकार से यह मांग की गई है।
पंचोली ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जनजातीय समुदायों ने अनेक बलिदान दिए। इनमें वागड़ के संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में चल रहे भगत आंदोलन को कुचलने के लिए 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ धाम पर अंग्रेजों द्वारा किया गया नरसंहार महत्वपूर्ण घटना है। इस गोलीकांड में 1500 से अधिक जनजातीय महिला, पुरुष और बच्चों के मारे जाने का दावा किया जाता है। यह घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड से करीब छह वर्ष पहले हुई थी।
उन्होंने कहा कि गोविंद गुरु के नेतृत्व में दक्षिण राजस्थान के भील समाज का यह आंदोलन अपनी राष्ट्रीय अस्मिता, पारंपरिक संस्कृति और जीवन मूल्यों की रक्षा के साथ औपनिवेशिक कानूनों तथा अंग्रेजी शासन के विरोध का आंदोलन था। इस आंदोलन ने गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के जनजातीय क्षेत्रों में भी स्वतंत्रता संघर्ष की चेतना को मजबूत किया।
इतिहास में उचित स्थान नहीं मिलने का आरोप
पंचोली ने कहा कि आजादी के बाद तत्कालीन सरकारों ने जनजातीय समाज के गौरवशाली बलिदानों को इतिहास और पाठ्यपुस्तकों में उचित स्थान नहीं दिया। उन्होंने इसे विडंबना बताते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए बलिदानों को मान्यता दिलाने के लिए भी जनजातीय समाज को मांग करनी पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णयों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े अनेक स्थलों और घटनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है, लेकिन मानगढ़ धाम को अभी तक वह राष्ट्रीय पहचान नहीं मिली, जिसका वह हकदार है।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कर चुके हैं मानगढ़ का दौरा
पंचोली ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम का दौरा कर यहां के बलिदानियों, देशभक्तों और समाज की विरासत को नमन किया था। राष्ट्रपति ने भी 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ धाम पहुंचकर जनजातीय बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी थी।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भी मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में मान्यता दिए जाने की सिफारिश कर चुका है। आयोग की ओर से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. धर्मवीर शर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय दल ने अगस्त 2022 में मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक महत्व और बलिदानों का विस्तृत अध्ययन कर शोध आधारित रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।
तीनों राज्यों से पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग
पंचोली ने कहा कि कल्याण आश्रम का स्पष्ट मत है कि मानगढ़ धाम केवल जनजातीय समाज ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के गौरव का विषय है। भारत सरकार को मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के साथ इसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण और विकास सुनिश्चित करना चाहिए। इससे घटना से जुड़े दबे और महत्वपूर्ण साक्ष्य भी सामने आ सकेंगे।
उन्होंने राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश की सरकारों से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि तीनों राज्यों के स्कूल-कॉलेजों की पाठ्यपुस्तकों में मानगढ़ के गौरवशाली इतिहास को उचित स्थान दिया जाना चाहिए। साथ ही सामाजिक-धार्मिक संगठनों, नेताओं और जनप्रतिनिधियों से जनजातीय अस्मिता और गौरव से जुड़े इस मुद्दे पर मतभेद भुलाकर सामूहिक प्रयास करने की अपील की।