गोवा से लाए गए आदिवासी बच्चों के मामले पर बोले- ‘आदिवासी हिंदू नहीं हैं’ जैसी सोच फैलाने का संगठित प्रयास
उदयपुर, 19 जुलाई: गोवा से बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा छुड़ाकर उदयपुर लाए गए सात आदिवासी बच्चों के मामले में उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने गंभीर आरोप लगाते हुए धर्मांतरण के एक संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने का दावा किया है। शनिवार शाम जारी वीडियो संदेश में सांसद ने कहा कि गरीब आदिवासी बच्चों को मुफ्त शिक्षा का लालच देकर राजस्थान से तमिलनाडु ले जाने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने इसे केवल मानव तस्करी का मामला नहीं, बल्कि धर्मांतरण के बड़े नेटवर्क का हिस्सा बताया।
सांसद ने दावा किया कि ऋषभदेव थाना क्षेत्र के कानूवाड़ा मामले में 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जिनमें नेपाल, पंजाब और छत्तीसगढ़ के लोग भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी लोग आदिवासी क्षेत्रों में रहकर स्थानीय समाज में अलगाव पैदा करने और धर्मांतरण को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। सांसद ने यह भी कहा कि कुछ संगठन “आदिवासी हिंदू नहीं हैं” जैसी विचारधारा को बढ़ावा देकर सामाजिक विभाजन पैदा कर रहे हैं और विकास कार्यों में बाधा डालना चाहते हैं।
रावत ने डूंगरपुर और बांसवाड़ा की पूर्व घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों की गहन जांच आवश्यक है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री से पूरे मामले की एनआईए और सीबीआई से जांच कराने की मांग की ताकि कथित नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचा जा सके। उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले रेलवे पुलिस ने सात आदिवासी बच्चों को गोवा में सुरक्षित बरामद किया था। ये बच्चे कथित तौर पर तमिलनाडु ले जाए जा रहे थे। मामले की जांच अभी जारी है।