महिलाओं को 33% आरक्षण से लोकतंत्र होगा अधिक समावेशी
राजसमंद/उदयपुर, 11 अप्रैल: राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” को महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर उनकी भागीदारी को मजबूती देगा और भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाएगा।
निर्णय प्रक्रिया में बढ़ेगी भागीदारी
सांसद मेवाड़ ने कहा कि यह कानून केवल विधायी बदलाव नहीं, बल्कि महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी दिलाने वाली सामाजिक-राजनीतिक क्रांति है। इससे नीति निर्माण में महिलाओं की आवाज मजबूत होगी और उनके मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा।
परिसीमन के बाद होगा लागू
उन्होंने बताया कि यह अधिनियम परिसीमन प्रक्रिया के बाद लागू किया जाएगा। केंद्र सरकार इसे शीघ्र लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ा रही है, जिससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और सशक्त होगी।
तीन दशक का इंतजार हुआ पूरा
सांसद ने कहा कि महिला आरक्षण का यह प्रयास करीब 30 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद साकार हुआ है। 1996 से कई बार प्रयास हुए, लेकिन अब संसद की मंजूरी मिलना लोकतांत्रिक इतिहास की बड़ी उपलब्धि है।
महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह निर्णय सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह अधिनियम “सशक्त नारी, सशक्त भारत” के संकल्प को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।