एक गांव, तीन नामों का उलझा इतिहास

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मुद्दा : ग्रामीण बोले- ‘सांगा बावड़ी’ नाम से ही जुड़ी है गांव की पहचान
उदयपुर, 14 मई
: सलूम्बर जिले की सराड़ा तहसील स्थित एक गांव इन दिनों अपने तीन अलग-अलग नामों को लेकर चर्चा में है। मार्ग संकेतकों पर गांव का नाम “सांगा बावजी” लिखा है, ग्रामीण इसे “सांगा बावड़ी” कहते हैं, जबकि गांव के स्कूल पर “मेघात फला” अंकित है। नामों की इस विसंगति से ग्रामीणों में भ्रम की स्थिति है। अब ग्रामीणों ने गांव का पारंपरिक और ऐतिहासिक नाम “सांगा बावड़ी” करने की मांग उठाई है।
सभ्यता अध्ययन केन्द्र राजस्थान चैप्टर ने इस संबंध में सांसद डॉ. मन्नालाल रावत को आग्रह पत्र भेजा है।
महाराणा सांगा से जुड़ी है जनश्रुति
संयोजक मनोज जोशी ने बताया कि गांव में महाराणा सांगा द्वारा बनवाई गई बावड़ी का उल्लेख जनश्रुतियों में मिलता है। ग्रामीणों के अनुसार इसी बावड़ी के नाम पर गांव की पहचान बनी। बुजुर्ग मोड़ीलाल मीणा ने बताया कि वर्षों पहले खेरकी नदी पर बना तालाब टूटने से आई गाद में यह बावड़ी दब गई थी।
शोध टीम ने किए प्राचीन बसावट के संकेत
सभ्यता अध्ययन केन्द्र की टीम ने गांव का दौरा कर ऐतिहासिक तथ्यों का अध्ययन किया। वरिष्ठ पुरातत्वविद् डॉ. जीवन सिंह खरकवाल ने बताया कि गांव में प्राचीन बसावट के अवशेष दिखाई देते हैं, हालांकि इसके लिए विस्तृत शोध जरूरी है। उन्होंने कहा कि खेरकी तालाब की पाल दोबारा बनने पर यह क्षेत्र के लिए बड़ा जलस्रोत साबित हो सकता है।