ज्योतिषीय दृष्टि से बदलावों के संकेत
बांसवाड़ा, 1 मई: इस वर्ष मई माह की शुरुआत और समापन एक अनोखे खगोलीय संयोग के साथ हो रहा है। 1 मई और 31 मई—दोनों दिन पूर्णिमा पड़ने से एक ही महीने में दो पूर्णिमा का दुर्लभ योग बन रहा है, जिसे Blue Moon कहा जाता है। यह संयोग न केवल खगोल विज्ञान बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रदीप द्विवेदी के अनुसार पूर्णिमा का संबंध मन, भावनाओं और जल तत्व से माना जाता है। एक ही माह में दो बार चंद्र ऊर्जा का चरम पर पहुंचना मानसिक और सामाजिक स्तर पर उतार-चढ़ाव ला सकता है। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय अप्रत्याशित घटनाओं, अचानक फैसलों और बदलावों का संकेत दे सकता है।
सतर्कता और संतुलन की सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार इस अवधि में महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय संयम बरतना उचित रहेगा। हालांकि, इसे अंधविश्वास के रूप में नहीं बल्कि एक संकेत के रूप में देखने की सलाह दी जा रही है। खगोलीय रूप से यह एक सामान्य घटना है, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण इसे ऊर्जा परिवर्तन और परिस्थितियों में हलचल का समय मानता है।
क्या है ब्लू मून का वैज्ञानिक आधार
चंद्रमा का एक चक्र लगभग 29.5 दिनों का होता है। ऐसे में 30 या 31 दिन वाले महीने में यदि पहली पूर्णिमा शुरुआत में पड़ जाए, तो अंत में दूसरी पूर्णिमा आ सकती है। इसी दूसरी पूर्णिमा को ब्लू मून कहा जाता है। यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जो हर कुछ वर्षों में देखने को मिलती है।